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नीतियां सही नहीं, पिछले 5 वर्ष से लगातार घट रही जीडीपी

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विश्व बैंक के पूर्व मुख्य अर्थशास्त्री ने चेताया

नई दिल्ली। विश्व बैंक के पूर्व मुख्य अर्थशास्त्री कौशिक बसु ने भारत की विकास दर को लेकर चिंता प्रकट की है। बसु ने एक ट्वीट के जरिए कहा कि पिछले पांच वर्षों से लगातार देश की जीडीपी ग्रोथ रेट में गिरावट आई है। उन्होंने कहा कि साल 1947 के बाद से ऐसा पहले कभी नहीं हुआ। आंकड़ों को कोई झुठला नहीं सकता।

बसु ने अपनी ट्वीट में पिछले पांच वित्त वर्ष के दौरान देश की जीडीपी ग्रोथ के आंकड़े भी दिए हैं। उन्होंने बताया कि वित्त वर्ष 2016-17 में जीडीपी ग्रोथ रेट 8.2 फीसद रही थी। इसके बाद वर्ष 2017-18 में यह घटकर 7.2 फीसद रह गई।

इसी तरह, वर्ष 2018-19 में 6.1 फीसद, वर्ष 2019-20 में 4.2 फीसद और वर्ष 2020-21 में देश की जीडीपी निगेटिव -7.3 फीसद रही है। उन्होंने कहा कि हर वित्त वर्ष की ग्रोथ रेट पिछले वित्त वर्ष से कम है।

नीतिया सही नहीं: बसु
बसु ने कहा कि समग्र अर्थव्यवस्था बढ़ रही है, लेकिन भारत का आधा तबका आज भी गरीबी में है, अभी भी वह मंदी की मार सह रहा है। उन्होंने कहा कि यह दुःखद है कि पिछले कुछ वर्षों में देश की नीति बड़े पैमाने पर बड़े व्यवसायों पर केंद्रित रही है।

बढ़ती महंगाई चिंताजनक
बसु ने हाल ही में देश में बढ़ती महंगाई को लेकर भी चेताया था। उनका कहना था कि भारत की समग्र वृहद आर्थिक स्थिति में सुधार हो रहा है, लेकिन विकास शीर्ष स्तर पर ही केंद्रित है, जो एक चिंताजनक ट्रेंड है। आज देश महंगाई जनित मंदी से जूझ रहा है और इससे निपटने के लिए बहुत सावधानी बरतते हुए नीतिगत फैसले लेने होंगे। बता दें कि बसु इस समय यूएस में कॉर्नेल यूनिवर्सिटी में अर्थशास्त्र के प्रोफेसर हैं।


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