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21 जून को लगेगा साल का पहला सूर्य ग्रहण

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900 साल बाद बना है योग

नई दिल्ली। आषाण अमावस्या यानी 21 जून को लगने वाला कंकणाकृति खण्डग्रास सूर्य ग्रहण साल का पहला सूर्य ग्रहण होगा। 900 साल बाद चूड़ामणि योग आया है, जब सूर्य ग्रहण पर चंद्रमा सूर्य के करीब 99 फीसदी भाग को ढक लेगा। कंकणाकृति सूर्यग्रहण को मुंबई, नई दिल्ली, राजस्थान, हरियाणा, उत्तराखंड के उत्तरी भाग तथा पंजाब के दक्षिणी भाग के कुछ हिस्सों में आंशिक रूप से देखा जा सकेगा। भारत के 23 राज्यों में यह ग्रहण खंडग्रास के रूप में दिखाई देगा। भारत के अतिरिक्त यह ग्रहण अफ्रीका, पूर्वी-दक्षिणी यूरोप, उत्तरी आस्ट्रेलिया एवं मध्य-पूर्वी एशिया के समस्त देशों में दिखाई देगा।

21 जून 2020 का सूर्य ग्रहण वलयाकार सूर्य ग्रहण होगा। इसका परिमाण 0.99 होगा। यह पूर्ण सूर्यग्रहण नहीं होगा, क्योंकि चन्द्रमा की छाया सूर्य का मात्र 99% भाग ही ढकेगी। आकाशमण्डल में चन्द्रमा की छाया सूर्य के केन्द्र के साथ मिलकर सूर्य के चारों ओर एक वलयाकार आकृति बनायेगी। खण्डग्रास सूर्य ग्रहण की अवधि 03 घंटे 28 मिनट्स 36 सेकंड रहेगी।

वैज्ञानिक दृष्टिकोण
बता दें कि सूर्य ग्रहण एक खगोलीय घटना है। जब चंद्रमा, पृथ्वी और सूर्य के मध्य से होकर गुजरता है, तो उस दौरान पृथ्वी से देखने पर सूर्य पूर्ण अथवा आंशिक रूप से चंद्रमा द्वारा आच्छादित हो जाता है। जब सूर्य और पृथ्‍वी के बीच में चंद्रमा आ जाता
है तो चंद्रमा के पीछे सूर्य का बिंब कुछ समय के लिए ढक जाता है। इसी घटना को सूर्यग्रहण कहते हैं। सूर्य ग्रहण को आंखों से सीधे देखना नहीं चाहिए।

एक महीना में 2 ग्रहण
बता दें कि इसी महीने यानी 5 जून को चंद्र ग्रहण लग चुका है। एक ही महीने में दो ग्रहण लगना सही नहीं है। ज्योतिषियों के अनुसार, एक ही माह में 2 ग्रहण प्राकृतिक आपदाओं के साथ ही महामारी लेकर आते हैं। अमावस्या पर यह ग्रहण लगने के
कारण अमावस्या का श्राद्ध कर्म ग्रहण के बाद होगा।

चूड़ामणि योग युक्त ग्रहण
जब सूर्यग्रहण रविवार को और चन्द्र ग्रहण सोमवार को लगता है, तो वह ग्रहण चूड़ामणि योग युक्त हो जाता है। चूड़ामणि योग युक्त ग्रहण विशेष फलप्रद व सिद्धप्रद होता है। ज्योतिषों के अनुसार, मिथुन राशि में होने जा रहे इस ग्रहण के समय मंगल जल तत्व की राशि मीन में स्थित होकर सूर्य,बुध,चंद्रमा और राहु को देखेंगे,जो अशुभ संकेत है। राहु और केतु तो सदैव उल्टी चाल ही चलते हैं, तो इस लिहाज से कुल 6 ग्रह वक्री रहेंगे। यह स्थिति पूरे विश्व में उथल-पुथल मचाएगी।


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