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BMC Election 2026: 15 जनवरी को वोटिंग, मुंबई मनपा चुनाव से बदलेगी महाराष्ट्र की राजनीति

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  • मुंबई समेत 29 महानगरपालिकाओं के चुनाव का ऐलान

  • बीएमसी चुनाव में भाजपा–शिवसेना बनाम उद्धव ठाकरे की अग्निपरीक्षा

  • कांग्रेस और राकांपा के अलग-अलग दांव से बदला सियासी गणित

  • नामांकन से पहले शुरू हुई जोड़-तोड़ और रणनीति

    ✍🏻 प्रहरी संवाददाता, मुंबई | महाराष्ट्र की सियासत एक बार फिर गरमाने वाली है। मुंबई महानगरपालिका (BMC) समेत राज्य की 29 महानगरपालिकाओं के चुनाव का ऐलान होते ही प्रदेश में ‘मिनी आम चुनाव’ जैसा माहौल बन गया है। चुनाव आयोग के कार्यक्रम के अनुसार 15 जनवरी को मतदान होगा, जबकि 16 जनवरी को नतीजे घोषित किए जाएंगे। घोषणा के साथ ही आचार संहिता लागू हो गई है और राजनीतिक दलों की रणनीतिक बिसात खुलकर सामने आने लगी है।

    बीएमसी चुनाव को महाराष्ट्र की राजनीति का सेमीफाइनल माना जाता है। देश के सबसे अमीर महानगर पालिका पर नियंत्रण सिर्फ स्थानीय सत्ता का सवाल नहीं, बल्कि मुंबई से लेकर दिल्ली तक राजनीतिक संदेश देने की ताकत रखता है। ऐसे में यह चुनाव सत्तारूढ़ भाजपा–शिवसेना (शिंदे) गठबंधन और बिखरे विपक्ष के लिए निर्णायक साबित हो सकता है।

पिछले विधानसभा चुनाव में करारी हार झेल चुके शिवसेना (यूबीटी), कांग्रेस और राकांपा (शरदचंद्र पवार) के लिए भी यह चुनाव साख बचाने की चुनौती है। खासतौर पर उद्धव ठाकरे के लिए बीएमसी केवल एक नगर निगम नहीं, बल्कि पार्टी के अस्तित्व और भविष्य का सवाल बन चुकी है। पिछले तीन दशकों से अविभाजित शिवसेना के कब्जे में रही मनपा को बचाए रखना अब उनके लिए राजनीतिक ‘लाइफलाइन’ जैसा है।

दूसरी ओर, मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस किसी भी कीमत पर बीएमसी में भाजपा का परचम लहराना चाहते हैं। इसके लिए वे उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की शिवसेना के साथ सीट-बंटवारे से लेकर रणनीतिक समझौते तक हर विकल्प खुले रखने के संकेत दे चुके हैं। हालांकि ठाणे, नवी मुंबई, पुणे और आसपास के इलाकों में भाजपा, अजीत पवार गुट और एकनाथ शिंदे गुट के बीच अंदरूनी प्रतिस्पर्धा भी खुलकर दिख रही है, जहां ये तीनों दल एक-दूसरे के कार्यकर्ताओं को तोड़ने से भी नहीं चूक रहे।

कांग्रेस का मनपा चुनाव अकेले लड़ने का फैसला विपक्षी एकता को और कमजोर करता दिख रहा है। वहीं राकांपा के विभाजन के बाद पहली बार महानगरपालिका चुनाव में अजित पवार और शरद पवार गुट आमने-सामने होंगे, जिससे शहरी राजनीति में त्रिकोणीय मुकाबले की स्थिति बन रही है।

चुनाव आयोग के मुताबिक 23 दिसंबर से नामांकन प्रक्रिया शुरू होगी। जिन 29 महानगरपालिकाओं में चुनाव हो रहे हैं, उनमें से 27 का कार्यकाल तीन से चार साल पहले ही समाप्त हो चुका है, जबकि जालना और इचलकरंजी में पहली बार महानगरपालिका चुनाव होंगे। नासिक, नागपुर, छत्रपति संभाजीनगर और कोल्हापुर जैसे बड़े शहर भी इस सियासी संग्राम का हिस्सा होंगे, जहां हर वार्ड, हर सीट सत्ता के संतुलन को नए सिरे से परिभाषित करेगी।


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