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महायुति में सीट बंटवारे पर खींचतान
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बीजेपी-शिवसेना आमने-सामने; मुंबई की सत्ता की लड़ाई और तेज
✍🏻 प्रहरी संवाददाता मुंबई | मुंबई बीएमसी चुनाव से पहले महायुति गठबंधन में सीट बंटवारे को लेकर खींचतान चरम पर पहुंच गई है, जहां मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की अगुआई वाली सरकार में डिप्टी सीएम एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना ने 227 में से 90 से 100 वार्ड पर दावेदारी ने राजधानी की सियासत में नया उबाल ला दिया है।
नागपुर में हुई रणनीतिक बैठक में फडणवीस और शिंदे के साथ बीजेपी प्रदेश नेतृत्व ने बीएमसी की सीटों पर घंटों मंथन किया, जिसके बाद यह साफ हुआ कि शिवसेना अपने पारंपरिक गढ़ों और संगठनात्मक ताकत के दम पर महानगर पालिका में “मुख्य हिस्सेदारी” चाहती है, जबकि बीजेपी मनपा पर अपना वर्चस्व स्थापित करने की तैयारी में है।
सूत्रों के मुताबिक, शिंदे गुट ने महालक्ष्मी, दादर, वडाला, अंधेरी, बांद्रा (पूर्व) और पूर्वी उपनगरों जैसे इलाकों में दशकों से बने जनाधार का हवाला देकर 90–100 सीटों की मांग रखी है और तर्क दिया है कि 2022 के विभाजन के बावजूद स्थानीय स्तर पर शिवसेना का कैडर अब भी चुनावी समीकरण बदलने की क्षमता रखता है।
जवाब में बीजेपी ने महायुति के लिए 51 फीसदी वोट शेयर और 150 से अधिक सीटों का टारगेट तय करते हुए संकेत दिया है कि वह बीएमसी में “बड़े भाई” की भूमिका से पीछे हटने को तैयार नहीं, जिसके चलते कई वार्डों पर दोस्ताना मुकाबले की स्थिति भी बन सकती है।
हालांकि सीट शेयरिंग पर बढ़ते तनाव के बीच तय हुआ है कि बीजेपी और शिवसेना के चार–चार पदाधिकारियों के साथ एनसीपी और अन्य सहयोगी दलों के प्रतिनिधियों वाली समन्वय समिति हर वार्ड की सामाजिक–राजनीतिक तस्वीर के आधार पर अंतिम फॉर्मूला तैयार करेगी और जिन 5–10 फीसदी सीटों पर सहमति नहीं बनेगी, वहां फडणवीस और शिंदे सीधे हस्तक्षेप कर फैसला करेंगे।
उधर, देश के सबसे समृद्ध नगर निगम माने जाने वाले बीएमसी पर कब्ज़े की जंग सिर्फ स्थानीय सत्ता नहीं, बल्कि 2026 से पहले महाराष्ट्र की राजनीति में मनोवैज्ञानिक बढ़त का भी सवाल बन गई है, इसी वजह से महायुति के साथ-साथ विपक्षी खेमे भी बूथ मैनेजमेंट, संगठन पुनर्गठन और आक्रामक जनसंपर्क के ज़रिए मुंबई की गलियों में अपनी पकड़ मज़बूत करने में जुट गए हैं।
