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न्याय यात्रा से पहले कांग्रेस को डबल झटका !

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मुंबई से मिलिंद देवरा और असम से अपूर्ब भट्टाचार्य ने छोड़ा कांग्रेस का साथ

डिजिटल न्यूज डेस्क, मुंबई। राहुल गांधी की भारत जोड़ो न्याय यात्रा शुरू होने से पहले कांग्रेस को डबल झटका लगा है। रविवार को पहले महाराष्ट्र कांग्रेस के नेता मिलिंद देवरा ने इस्तीफा दे दिया, तो वहीं असम में अपूर्ब भट्टाचार्य ने भी कांग्रेस के सचिव पद से इस्तीफा दे दिया है। राहुल गांधी की यात्रा से पहले इन दोनों नेताओं के इस्तीफे को पार्टी के लिए बड़ा नुकसान माना जा रहा है। दरअसल, राहुल गांधी की यात्रा महाराष्ट्र और असम से भी निकलेगी।

मिलिंद देवरा ने शनिवार (13 जनवरी) को कांग्रेस से इस्तीफा देने की घोषणा की। मिलिंद के कांग्रेस छोड़ने की अटकलें काफी पहले से लगाई जा रही थीं। कहा जा रहा था कि महाराष्ट्र कांग्रेस के नेताओं से नाराज चल रहे हैं। आखिरकार रविवार को उन्होंने पार्टी को बाय कर दिया। पिछले 10 साल से चुनावी हार और कांग्रेस के सत्ता से बाहर रहने के बाद राजनीतिक तौर पर मिलिंद के लिए करो या मरो की स्थिति थी।

उन्होंने एक्स पर लिखा, “आज मेरी राजनीतिक यात्रा में एक महत्वपूर्ण अध्याय का समापन हुआ है। मैंने भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की प्राथमिक सदस्यता से अपना इस्तीफा दे दिया है, जिससे पार्टी के साथ मेरे परिवार का 55 साल पुराना रिश्ता खत्म हो गया है। मैं सभी नेताओं, सहकर्मियों और कार्यकर्ताओं का वर्षों से अटूट समर्थन करने के लिए आभारी हूं।”

दरअसल, पूर्व केंद्रीय मंत्री देवरा का यह फैसला हाल ही में हुई सीट-शेयरिंग को लेकर हुई बैठक में तय फॉर्मूले के बाद आया है, जिसमें शिवसेना (UBT) ने दक्षिण मुंबई संसदीय क्षेत्र पर अपना दावा ठोंका है। वर्ष 2014 से पहले इस सीट का प्रतिनिधित्व मिलिंद देवरा ही करते थे। मिलिंद देवरा ने इस सीट पर शिवसेना (यूबीटी) के दावे पर सार्वजनिक रूप से नाराजगी व्यक्त की थी।

क्या कहा जयराम रमेश ने?

कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं ने उनके पिता और कांग्रेस के दिवंगत नेता मुरली देवरा का जिक्र करते हुए उन पर हमला बोला। कांग्रेस ने आरोप लगाया कि त्यागपत्र की घोषणा का समय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा तय किया गया है। पार्टी महासचिव जयराम रमेश ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पहले ट्विटर) पर लिखा, “मुरली देवड़ा हमेशा कांग्रेस पार्टी के साथ खड़े रहे।” रमेश ने एक्स पर लिखा, “मैं मुरली के साथ अपने लंबे वर्षों के जुड़ाव को बड़े चाव से याद करता हूं। उनके सभी राजनीतिक दलों में करीबी दोस्त थे, लेकिन वह एक कट्टर कांग्रेसी थे, जो सुख-सुविधा में हमेशा कांग्रेस पार्टी के साथ खड़े रहे। तथास्तु !”

 


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