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निजी मेडिकल कॉलेजों में भी सरकारी फीस स्ट्रक्चर लागू होगी!

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मेमोरेंडम में 50 फीसद सीट के लिए शुल्क सरकार के निर्धारित शुल्क के समान रखने की सिफारिश

विशेष प्रहरी संवाददाता, मुंबई। राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग ने दिसंबर में विशेषज्ञ समिति के एक फैसले पर सहमति जताई है। राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (एनएमसी) के एक निर्णय के अनुसार, निजी मेडिकल कॉलेजों और डीम्ड विश्वविद्यालयों में 50 फीसदी सीटों की फीस संबंधित राज्य सरकारों या केंद्र शासित प्रदेश के सरकारी मेडिकल कॉलेजों के बराबर होनी चाहिए।

एनएमसी की ओर से कहा गया है कि इस शुल्क संरचना (फीस स्ट्रक्चर) का लाभ पहले उन मेडिकल कॉलेज के विद्यार्थियों को उपलब्ध कराया जाएगा, जिन्होंने सरकारी कोटे की सीटों के लिए आवेदन किया था। निजी मेडिकल कॉलेज या डीम्ड विश्वविद्यालयों में सैंक्शन 50 फीसदी सीटों के लिए प्रस्तावित फीस स्ट्रक्चर का लाभ मिल सकेगा।

विशेषज्ञ समिति का यह निर्णय राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग अधिनियम, 2019 के अनुसार है, जो एनएमसी को निजी और चिकित्सा संस्थानों में 50 फीसदी सीटों के लिए शुल्क निर्धारित करने का अधिकार देता है। इस कानून के दायरे में डीम्ड यूनिवर्सिटी व निजी मेडिकल कॉलेज आते हैं।

सरकारी मेमोरेंडम में यह भी कहा गया है कि यदि किसी कॉलेज में सरकारी कोटे के तहत निर्धारित सीटें 50 फीसदी से कम हैं, तो यह लाभ शेष उम्मीदवारों को योग्यता के आधार पर दिया जाएगा।

वर्ष 2019 में, भारत के तत्कालीन चिकित्सा आयोग के बोर्ड ऑफ गवर्नर्स की ओर से एक विशेषज्ञ समिति का गठन किया गया था। इस समिति ने एमबीबीएस और स्नातकोत्तर पाठ्यक्रमों के लिए शुल्क के निर्धारण के लिए 26 व्यापक मसौदा दिशानिर्देशों की सिफारिश की थी। 25 मई 2021 को इस दिशानिर्देशों पर सार्वजनिक टिप्पणी मांगी गई थी।

एक पुनर्गठित विशेषज्ञ समिति ने प्राप्त 1,800 प्रतिक्रियाओं की समीक्षा की और संशोधित मसौदा दिशानिर्देश प्रस्तुत किए। इसकी सिफारिशों को एनएमसी ने 29 दिसंबर को स्वीकार कर लिया था।


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