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जीएसटी बकाए का भुगतान नहीं, वित्तमंत्री पवार ने उठाए केंद्र सरकार की भूमिका पर सवाल

मुंबई। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने जीएसटी काउंसिल की बैठक के बाद राज्य सरकारों को दो विकल्प दिए हैं। केंद्र सरकार राज्यों के नुकसान की भरपाई नहीं करेगी। जीएसटी काउंसिल को ही संसाधन का इंतजाम करना होगा। महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री व वित्त मंत्री अजीत पवार ने जीएसटी बकाए को लेकर केंद्र सरकार की भूमिका पर सवाल उठाए हैं।उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र सरकार का केंद्र सरकार के पास 22,534 करोड़ रुपये का जीएसटी रिफंड बकाया है। अगर सरकार से भुगतान नहीं किया गया तो यह आंकड़ा एक लाख करोड़ रुपये तक बढ़ सकता है।

बता दें कि महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने बुधवार को जीएसटी काउंसिल की बैठक से पहले केंद्र सरकार की नीतियों की आलोचना की थी। केंद्रीय वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण की अगुवाई में गुरुवार को संपन्न हुई जीएसटी काउंसिल की बैठक में राज्य के वित्त मंत्री पवार ने कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से महाराष्ट्र का प्रतिनिधित्व किया। पवार ने कहा कि राज्यों की तुलना में कम ब्याज दरों पर केंद्र सरकार ऋण प्राप्त कर सकती है। केंद्र सरकार को कर्ज लेकर राज्यों को निधि उपलब्ध कराना चाहिए और राज्यों को कोरोना संकट से बाहर निकालना चाहिए।
अजीत पवार ने कहा कि जुलाई 2020 तक वस्तु और सेवा कर (जीएसटी) के मुआवजे के लिए केंद्र सरकार से महाराष्ट्र सरकार का 22,534 करोड़ रुपये बकाया है। अगर यह राशि समय पर भुगतान के बिना बढ़ती रही, तो यह दो साल में 1 लाख करोड़ रुपये हो जाएगी। पवार ने कहा कि जीएसटी लागू करने के दौरान केंद्र सरकार ने राज्यों को समय पर जीएसटी और बकाये का भुगतान करने की जिम्मेदारी स्वीकार की थी। अब राज्यों को वित्तीय संकट से बाहर निकालने के लिए, केंद्र सरकार को पहल करते हुए राज्यों को कम ब्याज दरों पर ऋण उपलब्ध कराना चाहिए।

पवार ने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा समय पर जीएसटी मुआवजा नहीं मिलने के कारण सभी राज्य वित्तीय संकट से जूझ रहे हैं। इससे विकास कार्य प्रभावित हो रहा है। वर्तमान में देश के लगभग सभी राज्य कोरोना संकट से जूझ रहे हैं। केंद्र से अधिक धन की आवश्यकता है। केंद्र ने राजस्व गारंटी ली है। लिहाजा केंद्र की जिम्मेदारी है कि वह राज्यों को समय पर मुआवजा प्रदान करे। केंद्र को इसके लिए कर्ज लेना चाहिए। क्योंकि राज्यों की तुलना में केंद्र सरकार कम दर पर ऋण प्राप्त कर सकती है।

वित्त मंत्री पवार ने महाराष्ट्र और अन्य राज्यों का बचाव करते हुए स्पष्ट किया कि वित्तीय बाधाओं के कारण राज्यों के लिए ऋण लेना संभव नहीं है। केंद्र सरकार कम दरों पर राज्यों को ऋण उपलब्ध करा सकती है। अगर राज्य सरकार उच्च ब्याज दरों पर उधार लेती हैं, तो यह उपकर को अनावश्यक रूप से प्रभावित करेगा और बोझ उपभोक्ताओं पर पड़ेगा। राज्य सरकारें अगर खुले बाजार से ऋण लेने की कोशिश करती हैं, तो आशंका है ब्याज दरें बढ़ जाएंगी और ऋण प्राप्त करना मुश्किल हो जाएगा।

जीएसटी परिषद की बैठक में उन्होंने कहा कि राज्यों को जीएसटी के नुकसान की भरपाई के लिए पेश किया गया उपकर पांच साल के लिए यानी 2022 तक वैध है। इस समय सीमा को बढ़ाया जाना चाहिए। केंद्र सरकार द्वारा राज्यों को दी गई राशि को उपकर की अवधि बढ़ाकर वसूल किया जाना चाहिए।

 

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