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आतंकवादी संगठनों के पाकिस्तानी आकाओं के नाम अब भी ब्लैक लिस्ट में शामिल नहीं : रिपोर्ट

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संयुक्त राष्ट्र। भारतीय उपमहाद्वीप में अल-कायदा (एक्यूआईएस), इस्लामिक स्टेट इन इराक एंड द लेवेंट- खुरासान (आईएसआईएल-के) और तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) जैसे आतंकवादी संगठनों के साथ पाकिस्तान का संबंध हमेशा से सामने आता रहा है। संयुक्त राष्ट्र की हाल ही में जारी एक रिपोर्ट में यह बात कही गई है कि आतंकी संगठनों से संबंध रखनेवाले पाकिस्तानी नागरिकों को अभी तक ब्लैक लिस्ट में नहीं डाला जा सका है।

बता दें कि ‘आईएसआईएस, अल-कायदा और संबद्ध व्यक्तियों एवं संस्थाओं से संबंधित विश्लेषणात्मक सहायता एवं प्रतिबंध निगरानी टीम’ की 26वीं रिपोर्ट रिलीज हुई है। इसमें कहा गया है कि अफगान विशेष बलों ने देशव्यापी अभियान चलाए हैं, जिससे आईएसआईएल-के का मुखिया असलम फारुकी, उसके पूर्ववर्ती जिया उल हक और अन्य आतंकियों को गिरफ्तार किया था। जांच में सामने आया है कि पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा का रहने वाला फारुकी, काबुल के एक प्रमुख गुरुद्वारे पर हुए घातक आतंकवादी हमले का मास्टरमाइंड था जिसमें 25 सिख मारे गए थे। लेकिन इसका नाम ब्लैक लिस्ट में नहीं डाला गया है।

रिपोर्ट में कहा गया कि संगठन में बांग्लादेश, भारत, म्यामां और पाकिस्तान से 150 से 200 के बीच सदस्य हैं और खबरें हैं कि अपने पूर्व आका की मौत का बदला लेने के लिए वह क्षेत्र में जवाबी कार्रवाई की साजिश रच रहा है।” प्रतिबंध निगरानी टीम की रिपोर्ट में कहा गया कि, ‘‘अफगानिस्तान में मौजूद सबसे बड़ा आतंकवादी संगठन” तहरीक-ए-तालिबान है जिसकी अगुवाई आमिर नूर वली महसूद कर रहा है। टीटीपी सगरना बनने के दो साल के बाद, यूएनएससी प्रतिबंध समिति ने पाकिस्तानी मूल के महसूद को इस माह वैश्विक आतंकवादी घोषित किया। महसूद का समर्थन उसके साथी कारी अमजद और टीटीपी प्रवक्ता मोहम्मद खुरासानी करते हैं और दोनों का ही नाम यूएनएससी प्रतिबंध समिति में शामिल नहीं है।


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