उबाठा के प्रस्ताव को सत्ताधारी भाजपा-शिवसेना की मंजूरी
✍🏻 प्रहरी संवाददाता, मुंबई | मुंबई में 500 वर्ग फुट तक के घरों को पहले ही पूर्ण संपत्ति कर छूट दिए जाने के बाद अब 700 वर्ग फुट तक के आवासीय फ्लैटों को भी पूरी तरह संपत्ति कर से मुक्त करने का प्रस्ताव महानगरपालिका सभागार में पारित किया गया है। विशेष बात यह है कि यह प्रस्ताव उबाठा की ओर से पूर्व स्थायी समिति अध्यक्ष यशोधर फणसे ने पेश किया और सत्ताधारी भाजपा ने इसे मंजूरी दे दी।
आम तौर पर ऐसा प्रस्ताव सत्ताधारी पक्ष की ओर से लाया जाना और उसे स्वीकृति मिलना अपेक्षित होता है, लेकिन वास्तविकता में उबाठा द्वारा प्रस्तुत प्रस्ताव को महापौर ऋतु तावड़े ने मंजूरी देते हुए इसका श्रेय उबाठा की झोली में डाल दिया।
बढ़ते आर्थिक बोझ के कारण कई परिवारों को अपने फ्लैट बेचकर मुंबई से बाहर पलायन करने की नौबत आ रही है, यह चिंता व्यक्त करते हुए उबाठा के नगरसेवक यशोधर फणसे ने कहा कि मूल मुंबईकरों को मुंबई में ही रहने का अवसर मिलना चाहिए और उन्हें शहर छोड़ने की मजबूरी नहीं होनी चाहिए। इसके लिए वर्तमान में 500 वर्ग फुट तक की करमाफी की सीमा बढ़ाकर 700 वर्ग फुट तक की जानी चाहिए।
इस प्रस्ताव के माध्यम से राज्य सरकार को इस संबंध में उचित निवेदन भेजने की भी मांग की गई थी। इस प्रस्ताव को महानगरपालिका सभागार में मंजूरी दे दी गई है।
गौरतलब है कि 500 वर्ग फुट तक के घरों को संपत्ति कर में छूट दिए जाने के बाद उबाठा ने अपने चुनावी घोषणा पत्र में 500 से 700 वर्ग फुट तक के घरों को भी संपत्ति कर से मुक्त करने का वादा किया था। उसी के अनुरूप यह प्रस्ताव पेश किया गया।
हालांकि भाजपा पहले यह तर्क देकर प्रस्ताव को खारिज कर सकती थी कि इस विषय पर पूर्व में भी प्रस्ताव पारित हो चुके हैं, इसलिए नया प्रस्ताव नहीं लाया जा सकता। इससे पहले 500 वर्ग फुट तक के घरों को पूर्ण छूट देते समय 500 से 700 वर्ग फुट तक के घरों को 60 प्रतिशत तक कर छूट देने का प्रस्ताव भी पारित किया गया था।
इस आधार पर प्रशासन ठोस निर्णय लेकर भाजपा को इसका श्रेय दिला सकता था, लेकिन इस बार भाजपा की ओर से कोई आपत्ति नहीं उठाई गई।
वर्तमान में 500 वर्ग फुट तक के घरों को छूट दिए जाने से महानगरपालिका को लगभग 400 से 450 करोड़ रुपये के राजस्व का नुकसान हो चुका है। वहीं 500 से 700 वर्ग फुट के फ्लैटों से सबसे अधिक संपत्ति कर राजस्व प्राप्त होता है। ऐसे में यदि 700 वर्ग फुट तक के घरों को भी पूर्ण करमाफी दी गई तो महानगरपालिका की आर्थिक स्थिति पर गंभीर असर पड़ने और वित्तीय संतुलन बिगड़ने की आशंका जताई जा रही है।
