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रोजगार घर में नहीं, ठेका विदेश में: 5 साल में 50,000 भारतीय मजदूर इज़राइल होंगे रवाना

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  • लेबर मोबिलिटी प्रोटोकॉल पर मुहर, वाणिज्य से विनिर्माण तक भर्ती का रास्ता साफ

  • देश में रोजगार संकट, विदेश में श्रम समझौता

    ✍🏻 प्रहरी संवाददाता, मुंबई/नई दिल्ली/यरुशलम | देश में बढ़ती बेरोज़गारी और कौशल क्षमता से युक्त युवाओं के लिए सीमित अवसरों के बीच केंद्र की भाजपा सरकार ने विदेश में श्रम अवसरों के विस्तार का रास्ता चुना है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की इज़राइल यात्रा के दौरान, 26 फरवरी को जारी भारत–इज़राइल संयुक्त वक्तव्य में श्रमिक गतिशीलता (लेबर मोबिलिटी) पर अहम प्रोटोकॉल शामिल किया गया है, जिसके तहत अगले पांच वर्षों में 50,000 अतिरिक्त भारतीय कामगारों को इज़राइल में काम करने की अनुमति दी जाएगी। यह कदम ऐसे समय आया है, जब घरेलू स्तर पर रोजगार सृजन को लेकर सरकार लगातार सवालों के घेरे में रही है।

    विदेश मंत्रालय और प्रेस सूचना ब्यूरो के अनुसार, यह दोनों देशों की “स्पेशल स्ट्रेटेजिक पार्टनरशिप” का हिस्सा है। यह व्यवस्था 2022- 23 के मौजूदा फ्रेमवर्क का विस्तार है और इसे “स्पेशल स्ट्रेटेजिक पार्टनरशिप” का हिस्सा बताया गया है। भर्ती प्रक्रिया को संस्थागत बनाया जाएगा, जिसमें कौशल परीक्षण, अनुबंध शर्तें और डिजिटल भुगतान प्रणाली (UPI आधारित लेनदेन सहित) शामिल होंगे।

    इज़राइल में श्रमिकों की मांग हालिया सुरक्षा परिस्थितियों के बाद बढ़ी है। वहां नेपाल और थाईलैंड सहित कुछ देशों के कामगारों की संख्या घटी है। इस पृष्ठभूमि में भारत को वैकल्पिक श्रम स्रोत के रूप में देखा जा रहा है। निर्माण, देखभाल सेवाएं, रिटेल, लॉजिस्टिक्स, मैन्युफैक्चरिंग और हॉस्पिटैलिटी जैसे क्षेत्रों में भारतीय कामगारों की नियुक्ति की जाएगी। संयुक्त बयान में कुल 16 समझौतों और MoU का उल्लेख है, जिनमें कृषि प्रौद्योगिकी, जल प्रबंधन, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और औद्योगिक सहयोग भी शामिल हैं।

    सरकारी अनुमानों के अनुसार इज़राइल में कार्यरत भारतीय कामगारों द्वारा भेजी जाने वाली धनराशि लगभग 15 अरब डॉलर तक पहुंच सकती है। समझौते को लेकर राजनीतिक हलकों में बहस तेज है, जहां इसे रोजगार के अवसरों के विस्तार और घरेलू रोजगार नीति की दिशा दोनों के संदर्भ में देखा जा रहा है।

    सरकारी प्रेस रिलीज़ में लेबर मोबिलिटी के लिए तीन अलग-अलग Implementation Protocols का उल्लेख है:
    • वाणिज्य और सेवा क्षेत्र में
    • विनिर्माण क्षेत्र में
    • रेस्टोरेंट क्षेत्र में
        इन प्रोटोकॉल्स के तहत भारतीय श्रमिकों को विभिन्न क्षेत्रों में काम के अवसर मिलेंगे।

लेबर मोबिलिटी के तीन प्रमुख प्रोटोकॉल

9️⃣ वाणिज्य और सेवा क्षेत्र
रिटेल, क्लीनिंग, लॉजिस्टिक्स, वेयरहाउसिंग, फूड प्रोसेसिंग, होटल इंडस्ट्री (हॉस्पिटैलिटी) और रीसाइक्लिंग में भर्ती।
🔟 विनिर्माण क्षेत्र
कपड़ा, धातु, इलेक्ट्रॉनिक्स, केमिकल्स, फूड प्रोसेसिंग, लकड़ी-कागज, प्लास्टिक, रबर व अन्य औद्योगिक इकाइयों में नियुक्ति।
1️⃣1️⃣ रेस्तरां क्षेत्र
रेस्तरां, कैफे और खाद्य व्यवसायों में भारतीय मजदूरों को रोजगार के अवसर।

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