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अजीत पवार विमान हादसा: व्यवस्था की ‘लापरवाही’ या प्रशासनिक चूक? AAIB रिपोर्ट का बड़ा खुलासा

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  • बारामती एयरपोर्ट में सुरक्षा और फायर सिस्टम नहीं, AAIB रिपोर्ट में खुलासा

  • Learjet हादसा: ATC, रनवे और सुरक्षा पर गंभीर सवाल

✍🏻 प्रहरी संवाददाता, मुंबई | महाराष्ट्र की सियासत के सबसे कद्दावर चेहरों में शुमार अजीत पवार की जान लेने वाला बारामती विमान हादसा अब महज एक ‘दुर्घटना’ नहीं रह गया है। विमान दुर्घटना जांच ब्यूरो (AAIB) की 22 पन्नों की विस्तृत रिपोर्ट ने इस त्रासदी को ‘गंभीर प्रशासनिक विफलता’ के दस्तावेज़ में बदल दिया है। रिपोर्ट के खुलासे स्पष्ट करते हैं कि जिस एयरफील्ड पर वीआईपी मूवमेंट होता था, वह पूरी तरह असुरक्षित और मानकों से कोसों दूर था।

प्रशिक्षण के नाम पर ‘जानलेवा’ अनदेखी

AAIB के मुताबिक, महाराष्ट्र एयरपोर्ट डेवलपमेंट कंपनी लिमिटेड (MADC) द्वारा संचालित यह ‘अनियंत्रित’ एयरफील्ड भारी अव्यवस्थाओं का शिकार था। यहाँ करवर एविएशन और रेडबर्ड जैसी अकादमियाँ सक्रिय तो थीं, लेकिन ढांचा सिर्फ प्रशिक्षण तक सीमित था। इसके बावजूद, इसी अपर्याप्त और असुरक्षित ढांचे से लगातार चार्टर्ड और वीआईपी उड़ानें संचालित की जा रही थीं।

छात्रों के हाथ में वीआईपी सुरक्षा की कमान

रिपोर्ट का सबसे विचलित करने वाला तथ्य एटीसी (ATC) को लेकर है। जिस रनवे पर उपमुख्यमंत्री का विमान उतरना था, वहां कोई पेशेवर एयर ट्रैफिक कंट्रोलर मौजूद नहीं था। विमान को गाइड करने की जिम्मेदारी फ्लाइंग स्कूल के छात्रों और प्रशिक्षकों पर छोड़ दी गई थी, जो महज एक ‘हैंडहेल्ड रेडियो’ (RT) के जरिए तालमेल बिठा रहे थे।

जर्जर रनवे और गायब ‘विंडसॉक’

जांच में साफ हुआ कि रनवे की आखिरी मरम्मत मार्च 2016 में हुई थी। एक दशक से जर्जर इस पट्टी पर न तो मार्किंग बची थी और न ही सतह सुरक्षित थी। बिखरी हुई ‘कंक्रीट की बजरी’ (Loose Gravel) विमानों के लिए मौत का जाल बनी हुई थी। हद तो यह है कि रनवे 11 (टेबल-टॉप एंड) पर हवा की दिशा बताने वाला ‘विंडसॉक’ तक नहीं था, जिससे पायलट के लिए सुरक्षित लैंडिंग का सटीक अंदाजा लगाना नामुमकिन हो गया।

दमकल के लिए नगर परिषद पर निर्भरता

हादसे के वक्त एयरफील्ड के पास अपनी कोई रेस्क्यू या फायर फाइटिंग यूनिट (ARFF) नहीं थी। रिपोर्ट बताती है कि आपात स्थिति में भी हवाई अड्डा प्रशासन बारामती नगर परिषद की दमकल गाड़ियों पर निर्भर था। बिना पक्की बाउंड्री वॉल और अधूरी फेंसिंग वाले इस एयरफील्ड ने सुरक्षा प्रोटोकॉल की धज्जियां उड़ाकर रख दी थीं। 28 जनवरी 2026 की उस दोपहर ने अंततः यह साबित कर दिया कि जब सुरक्षा को हाशिए पर धकेल दिया जाता है, तो परिणाम कितने विनाशकारी होते हैं।


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