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जनवरी में FPI ने तो बिकवाली का रेकॉर्ड ही तोड़ दिया!

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हाइलाइट:

  • एफपीआई का हो रहा है भारतीय शेयर बाजार से मोहभंग
  • जनवरी के पहले 17 दिनों में विदेशी निवेशकों ने बेचा 44 हजार करोड़ का शेयर
  • पिछले 10 साल का रेकॉर्ड टूट गया

 

डिजिटल न्यूज डेस्क, मुंबई। विदेशी बिकवालों का भरोसा नए साल में भी शेयर बाजार पर नहीं बढ़ पाया है। जनवरी के महीने में विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) ने भारतीय इक्विटी में सक्रिय रूप से बिकवाली की। जनवरी 2025 के पहले 17 दिनों तक एफपीआई ने कुल 44,396 करोड़ रुपये मूल्य के शेयर बेचे हैं। बिकवाली का यह रिकॉर्ड पिछले 10 साल में सबसे ज्यादा है।

शुक्रवार को भी की थी बिकवाली

शुक्रवार यानी 17 जनवरी को एफपीआई ने 3,318.06 करोड़ रुपये के शेयर बेचे थे, जिससे प्रमुख सूचकांकों में गिरावट आई थी। अक्टूबर 2024 से ही भारतीय शेयर बाजारों में एफपीआई लगातार निकासी कर रहे हैं। हालांकि दिसंबर 2024 में थोड़ी राहत मिली, जब एफपीआई शुद्ध खरीदार बन गए और 15,446 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे।

पिछले कैलेंडर साल में केवल 427 करोड़ के शेयर खरीदे

कैलेंडर साल 2024 में एफपीआई केवल 427 करोड़ रुपये के शेयर ही खरीद सके थे। भारतीय शेयर बाजार में 1,101 करोड़ रुपये की मामूली खरीद के साथ, एफपीआई ने इस साल 17 जनवरी तक स्टॉक एक्सचेंजों के माध्यम से इक्विटी में 45,498 करोड़ रुपये बेचे थे। पिछले साल अक्टूबर और नवंबर महीने के दौरान एफपीआई ने कुल मिलाकर 1,15,629 करोड़ रुपये की बिकवाली की है।

पिछले दस वर्षों के आंकड़े कहते हैं कि एफपीआई साल के पहले महीने यानी जनवरी महीने में छह बार ही शुद्ध विक्रेता रहे हैं। कोराना काल में इनका सबसे बड़ा आउटफ्लो 33,303 करोड़ रुपये का रहा था। यह रेकॉर्ड इस साल 17 दिनों में ही टूट चुका है।

एफपीआई क्यों बेच रहे हैं इक्विटी

दुनिया भर में चल रही अनिश्चितताओं के कारण भारतीय शेयर बाजारों में एफआईआई बिकवाल बने हुए हैं। एफपीआई व्यवहार को प्रभावित करने वाले वैश्विक कारको में अमेरिकी मुद्रा की लगातार मजबूती, उच्च बॉन्ड प्रतिफल और अंतर्राष्ट्रीय व्यापार कानूनों की अप्रत्याशितता शामिल हैं।


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