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एकनाथ शिंदे बने महाराष्ट्र के 20वें मुखिया

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ठाणे का ऑटोवाला अब चलाएगा महाराष्ट्र की सरकार
पार्षद से सीएम तक का सफरनामा, 2019 में भी थे सीएम पद के उम्मीदवार

प्रहरी संवाददाता, मुंबई। महाराष्ट्र में भारी सियासी उथल-पुथल के बाद शिवसेना के बागी विधायक एकनाथ शिंदे ने आखिरकार महाराष्ट्र के 20वें मुख्यमंत्री के तौर पर शपथ ले ली। उनके साथ पूर्व मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने भी उप मुख्यमंत्री पद की शपथ ली।

गुरुवार को नाटकीय घटनाक्रम के बाद शिंदे ने राज्य के नए मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली। उससे पहले पूर्व मुख्यमंत्री फडणवीस ने पत्रकार सम्मेलन में शिवसेना के बागी गुट को बाहर से समर्थन देने की बात कही थी।

उन्होंने जैसे ही कहा कि भाजपा शिंदे गुट का समर्थन करेगी। सरकार में शामिल भी होगी, लेकिन वह खुद सरकार में शामिल नहीं होंगे।

इस बयान के बाद भाजपा का केंद्रीय नेतृत्व सक्रिय हो गया। पार्टी अध्यक्ष जेपी नड्डा को आगे आकर कहना पड़ा कि फडणवीस ने बड़ा दिल दिखाया है। अब उन्हें डिप्टी सीएम का पद स्वीकार करना चाहिए।

अमित शाह ने भी साफ तौर पर कहा कि फडणवीस सरकार में शामिल होने के लिए मान गए हैं। इसके बाद राजभवन में कुर्सियां बढ़ाई गईं और मुख्मंत्री पद के दावेदार रहे फडणवीस को डिप्टी पद से संतोष करना पड़ा।

बता दें कि महाराष्ट्र की राजनीति में बदलाव लाने वाले एकनाथ शिंदे ने हिंदुत्व के मुद्दे पर मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे के साथ बगावत की। वह एनसीपी और कांग्रेस के साथ गठबंधन करने और आदित्य ठाकरे को अधिक तवज्‍जो देने के बाद से उद्धव ठाकरे से नाराज थे।

शपथ ग्रहण करने के बाद उन्होंने कहा कि वह एक छोटा कार्यकर्ता हैं, लेकिन 50 विधायकों ने जो भरोसा दिखाया है, उस भरोसे को वह टूटने नहीं देंगे। केंद्र सरकार महाराष्ट्र को मदद करेगी। इससे राज्य का विकास होगा।

ऐसा रहा है राजनीतिक सफरनामा

शिंदे ने राजनीति में बड़ा नाम बनने से पहले आजीविका चलाने के लिए ऑटो रिक्शा भी चलाया है। 58 वर्षीय शिंदे मूल रूप से सातारा के हैं। वह पढ़ाई के लिए ठाणे आए थे और उसी दौरान एक बार उनकी मुलाकात शिवसेना नेता आनंद दिघे से हुई। यही मुलाकात उनके जीवन का टर्निंग पॉइंट रहा। उन्होंने शिवसेना ज्वाइंट कर ली।

साल 1997 में उन्होंने ठाणे महानगर पालिका चुनाव लड़ा और पहले चुनाव को जीतकर वह नगरसेवक बन गए। साल 2001 में वह महानगर पालिका सदन में विपक्ष के नेता भी बने। साल 2005 में जब नारायण राणे ने शिवसेना छोड़ी, तो उन्हें आगे बढ़ने का मौका मिला। उससे पहले शिवसेना के टिकट पर उन्होंने 2004 का विधानसभा चुनाव ठाणे सीट से लड़ा और विधायक बने। इसके बाद से लगातार वर्ष 2009, वर्ष 2014 और वर्ष 2019 से वह विधायक बनते रहे हैं।

 


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