आरटीआई में खुलासा, विधायकों से नहीं छूट रहा नगरसेवकी का मोह
मुंबई। विधानसभा चुनाव में विधायक चुने जाने के बाद भी कई नगरसेवक से विधायक बनने वाले नेताओं को मनपा का मोह नहीं छोड़ रहा है। मुंबई के तीन ऐसे विधायक हैं, जो एमएलए का चुनाव जीतने से पहले नगरसेवक थे, लेकिन अभी भी यह माननीय विधायक के साथ-साथ नगरसेवक को मिलने वाला मानधन भी ले रहे हैं। यह खुलासा सूचना के अधिकार के तहत मिला है।
नैतिक रूप से यह अपेक्षा की जाती है कि जो प्रतिनिधि बीएमसी प्रशासन में नगरसेवक हैं, वे विधायक और सांसद बनने के बाद मनपा से कोई मानधन नहीं लें। लेकिन नगरसेवक से विधायक बने पराग शाह, रईस शेख और दिलीप लांडे मनपा का मोह नहीं छोड़ पा रहे हैं। विधायक के साथ-साथ यह लोग नगरसेवक का मानदेय भी ले रहे हैं। यह जानकारी मनपा सचिव विभाग की ओर से आरटीआई कार्यकर्ता अनिल गलगली को दी गई है।
गलगली ने मनपा सचिव कार्यालय से जानकारी मांगी थी कि वर्तमान में विधायक और सांसद बन चुके नगरसेवकों के नाम, वेतन और भत्ते का खुलासा किया जाए। मनपा सचिव ने जो जानकारी भेजी, उसके तहत सांसद मनोज कोटक व विधायक रमेश कोरगांवकर मनपा से कोई मानदेय नहीं ले रहे हैं, जबकि विधायक रईस शेख, पराग शाह और दिलीप लांडे ने 25000 रुपये मानदेय एवं चार बैठकों के लिए 150 रुपये का भत्ता लिया है।
गलगली का कहना है कि नगरसेवकों को विधायक-सांसद बनने के बाद अपने पद से इस्तीफा दे देना चाहिए। राजनीतिक दलों को ऐसे जनप्रतिनिधियों से संबंधित सीट से इस्तीफा लेने की पहल करनी चाहिए, लेकिन किसी भी राजनीतिक दल ने फिलहाल ऐसा कोई भी फैसला नहीं लिया है। हालांकि पार्टियों को न्यूनतम मानदेय न लेने का निर्देश देना जरूरी है।
