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यूपी में 33 साल बाद पूर्व निदेशक को 3 साल की जेल

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लखनऊ। भ्रष्टाचार के मामले में लगभग 33 साल की सुनवाई के बाद केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) की अदालत ने तत्कालीन निदेशक को भ्रष्टाचार के एक मामले में तीन साल की कैद की सजा सुनाई है। वर्ष 1987 के दौरान पूर्व निदेशक ने सरकार को 44 लाख रुपये की चपत लगाई थी। बरेली में पोस्टेड टेलीकॉम सेक्टर (उत्तर क्षेत्र) के निदेशक डी.पी. श्रीवास्तव औऱ उनके सहयोगी को यह सजा सुनाई गई है।
दिल्ली में सीबीआई के प्रवक्ता ने कहा कि एक विशेष सीबीआई न्यायाधीश ने श्रीवास्तव को 70,000 रुपये के जुर्माने के साथ तीन साल की कैद और ग्रैंड टिम्बर इंडस्ट्रीज के उसके साथी दिल्ली के प्रदीप गोधवानी को 50,000 रुपये के जुर्माने के साथ कारावास की सजा सुनाई है। सीबीआई ने श्रीवास्तव और ग्रैंड टिम्बर इंडस्ट्रीज सहित अन्य के खिलाफ मामला दर्ज किया था। यह आरोप लगाया गया था कि वर्ष 1987 के दौरान उत्तर प्रदेश के बरेली में निदेशक (उत्तर क्षेत्र) टेलीकॉम के रूप में कार्य करते हुए, श्रीवास्तव ने गोधवानी, ग्रैंड टिम्बर इंडस्ट्रीज के पार्टनर और अन्य लोगों के साथ मिलकर एक साजिश रची और अत्यधिक दर या कीमत पर दो खरीद आदेश दिए। केंद्र सरकार को 44.43 लाख रुपये का चूना लगाने के इरादे से जाली निविदा ज्ञापन जारी किए गए। अधिकारी ने कहा कि एजेंसी ने आरोपियों के खिलाफ आरोप पत्र दायर किया था। मुकदमे के बाद, अदालत ने दोनों आरोपियों को दोषी पाया और उन्हें सजा सुनाई।


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