✍🏻 प्रहरी डिजिटल डेस्क, मुंबई | महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के हालिया बयान “दिल्ली अभी दूर है” ने राज्य की राजनीति में हलचल मचा दी है। भाजपा नेता के इस बयान को लेकर सियासी गलियारों में कई तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं। जानकारों का मानना है कि फडणवीस ने एक तीर से दो निशाने साधे हैं- पहला, महायुति के घटक दलों को यह संकेत देना कि वे आगामी विधानसभा चुनाव तक मुख्यमंत्री बने रहेंगे, और दूसरा, पार्टी के भीतर यह संदेश देना कि वह अभी केंद्रीय राजनीति में नहीं जा रहे हैं।
फडणवीस के इस बयान पर कांग्रेस और एनसीपी-शरद पवार गुट ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। कांग्रेस प्रवक्ता सचिन सावंत ने कहा कि मुख्यमंत्री का यह संदेश उन नेताओं के लिए है जो उनकी कुर्सी पर नजर गड़ाए बैठे हैं। उन्होंने कहा कि फडणवीस सीधे तौर पर उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे से नहीं कह सकते, इसलिए उन्होंने अप्रत्यक्ष रूप से यह टिप्पणी की।
वहीं, एनसीपी (शरद पवार गुट) के प्रवक्ता ने कहा कि यह बयान एकनाथ शिंदे और अजित पवार दोनों के लिए “सपना चकनाचूर” करने वाला संदेश है। दोनों नेताओं की स्थिति देखकर “मक्खी मारने” वाला मुहावरा याद आता है।
सूत्रों के मुताबिक, शिंदे गुट के एक नेता ने कहा कि राजनीति में कुछ भी संभव है और समय आने पर शिंदे दोबारा मुख्यमंत्री बन सकते हैं। वहीं, अजित पवार खेमे के नेताओं का कहना है कि राजनीति में संख्या बल ही असली ताकत है और बहुमत जिसके पास है, वही सत्ता तय करता है।
गौरतलब है कि राज्य में सत्तारूढ़ महायुति गठबंधन में भारतीय जनता पार्टी, उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की शिवसेना और उपमुख्यमंत्री अजित पवार के नेतृत्व वाली राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) शामिल हैं। शिवसेना से वर्ष 2022 में अलग होने के बाद शिंदे पिछले विधानसभा चुनाव तक मुख्यमंत्री रहे, जबकि फडणवीस उपमुख्यमंत्री थे। बीजेपी के साल 2024 के विधानसभा चुनाव में 132 सीट जीतने के बाद फडणवीस मुख्यमंत्री बने जबकि शिंदे उपमुख्यमंत्री की भूमिका में आ गए।
