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लक्ष्मी विलास बैंक पर एक महीने की मोरेटोरियम

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मुंबई। केंद्र सरकार के वित्त विभाग के निर्देश पर केंद्रीय बैंक ने प्राइवेट सेक्‍टर के लक्ष्‍मी विलास बैंक पर कई तरह की पाबंदियां लगा दी हैं। इसके साथ ही बैंक के बोर्ड को सस्पेंड करते हुए प्रशासक की नियुक्ति कर दी है। बैंक की निकासी की सीमा तय कर दी है। ग्राहक अब 16 दिसंबर तक बैंक से अधिकतम 25 हजार रुपये की ही निकासी कर सकेंगे। मोरेटोरियम के आदेश के मुताबिक, लक्ष्मी विलास बैंक आरबीआई की मंजूरी के बिना किसी भी सेविंग्स, करेंट या किसी दूसरे जमा अकाउंट में 25 हजार से ज्यादा की राशि का भुगतान नहीं करेगा। कैनरा बैंक के पूर्व नॉन-एग्जीक्यूटिव चेयरमैन टी. एन. मनोहरन को बैंक का प्रबंधक नियुक्त किया गया है। केंद्रीय बैंक ने सार्वजनिक तौर पर लक्ष्मी विलास बैंक की डीबीएस बैंक के साथ एकीकरण की एक ड्राफ्ट स्कीम पेश की है।
वित्त मंत्रालय के आदेश के मुताबिक, लक्ष्‍मीविलास बैंक पर एक महीने का मोरेटोरियम लगाया गया है। यह 17 नवंबर से 16 दिसंबर तक के लिए लागू किया गया है। यह आदेश आरबीआई अधिनियम की धारा 45 के तहत लाया गया है। आरबीआई का कहना है कि जमाकर्ताओं के हितों की रक्षा, वित्तीय और बैंकिंग स्थिरता को देखते हुए उसने यह कदम उठाया है। बैंक की वित्तीय स्थिति में तेज गिरावट आई है। बैंक को पिछले तीन साल से लगातार नुकसान हो रहा है, जिससे इसकी नेटवर्थ कम हुई है। बैंक के पास रणनीतिक योजना का अभाव है। एडवांस की गिरावट और बढ़ते एनपीए से नुकसान जारी रहने का अंदेशा है। इसके अलावा, बैंक में कई गंभीर गवर्नेंस मामले सामने आए हैं। हाल ही में लक्ष्मी विलास बैंक के 2 पूर्व अधिकारियों पूर्व जोनल हेड प्रदीप कुमार और पूर्व असिस्टेंट वाइस प्रेसिडेंट अंजनी कुमार वर्मा को 729 करोड़ की हेराफेरी के आरोप में गिरफ्तार किया गया था।


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