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जब शोले के हीमैन ने कहा- तू मेरा दोस्त है, लानत है ऐसी दोस्ती पर…

मुंबई. फिल्म ‘शोले’ के 45 साल पूरे होने पर बॉलीवुड के हीमैन धर्मेंद्र ने एक वीडियो शेयर किया है। इस वीडियो में जय यानी अमिताभ बच्चन अपने दोस्त वीरू यानी धर्मेंद्र से कहता है कि, ‘यानी शादी के बाद तेरे घर में मुझे आया की नौकरी मिलने वाली थी। तो वीरू कहता है समझा, तू मेरा दोस्त है, लानत है ऐसी दोस्ती पर… इसीलिए अकड़ रहा है न मेरा ये काम तेरे बगैर कोई दूसरा नहीं कर सकता। आज मेरी मां होती तो मेरी कब की शादी हो चुकी होती… मेरे छोटे-छोटे बाल-बच्चे होते। आज मेरा बाप होता तो बैंड बाजे के साथ मेरी शादी करके लाता। मेरे भाई-बहन होते मौसी के पैर छूकर भी बसंती से मेरी शादी करा देते… लेकिन ये मत भूल जय, जिसका कोई नहीं होता उसका भगवान होता है… मैंने तुझे क्या समझा था जय और तू क्या निकला।’

शोले के डायरेक्टर रमेश सिप्पी का कहना है कि 45 साल पहले रिलीज हुई फिल्म ‘शोले’ में मुख्य किरदार जय-वीरू और ठाकुर के लिए पहले फौजी की भूमिका तय की गयी थी और फिल्म का अंत भी अलग होना था। ‘अंदाज’ और ‘सीता और गीता’ जैसी फिल्में बनाने के बाद सिप्पी हॉलीवुड जैसी ऐक्शन फिल्म बनाना चाहते थे। संयोगवश, स्क्रिप्ट राइटर सलीम खान और जावेद अख्तर ने उन्हें शोले की कहानी सुनाई। सिप्पी ने कहा कि जब उन्हें कहानी सुनाई गई तो उन्हें दो फरार युवकों और उनके द्वारा उस ठाकुर की सहायता करने का विचार अच्छा लगा, जिसके परिवार को डकैतों ने मार डाला था।

सिप्पी ने कहा, ‘किरदार बाद में ध्यान आए लेकिन मुख्य कहानी वही रखनी थी। हम जय और वीरू को सेना का जवान दिखाना चाहते थे और ठाकुर को सेना का अफसर। बाद में ठाकुर को पुलिस वाला बनाया गया।’ उन्होंने कहा, ‘मूल विचार दो फरार युवकों (जय और वीरू) और वह ठाकुर की भावनात्मक कहानी से कैसे जुड़ते हैं इसको लेकर था। एक के बाद एक सारे किरदार सामने आ गए। जैसे जैसे पटकथा बढ़ती गई, सभी किरदारों में जान आ गई।’

बता दें कि शोले के निर्माण में दो साल से कुछ अधिक का समय लगा। शूटिंग तीन अक्टूबर 1973 को शुरू हुई और 15 अगस्त 1975 को फिल्म रिलीज हुई। फिल्म शोले में रमेश सिप्पी ने लगभग 3 करोड़ रुपये खर्च कर दिए थे। उन्होंने एक बार बताया था कि उनके पास फिल्म बनाने का बजट नहीं था, जिसके लिए उन्होंने अपने पिता जीपी सिप्पी से मदद ली थी। स्टारकास्ट पर ही उन्होंने 20 लाख रुपए खर्च किए थे।

निर्देशक ने कहा कि उन्हें पता था कि उनके हाथ में एक अच्छी फिल्म है। उन्होंने कहा, ‘हमें लगा कि हम अच्छी फिल्म बना रहे हैं,लेकिन यह नहीं पता था कि 45 साल बाद भी लोग इस फिल्म की बात करेंगे। फिल्म में सभी ने अपना पूरा योगदान दिया, लेकिन फिल्म को इतना प्यार मिलेगा यह हमने नहीं सोचा था।’

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