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महिला को परेशान करने के आरोप को लेकर मंत्री जयकुमार गोरे से विपक्षी दलों ने मांगा इस्तीफा

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बीजेपी नेता ने कहा, मामला छह साल पुराना है, कोर्ट ने किया है बरी

 

डिजिटल न्यूज डेस्क, मुंबई। महाराष्ट्र में विपक्षी दलों ने एक महिला को परेशान करने और उसे आपत्तिजनक तस्वीरें भेजने के आरोपी मंत्री जयकुमार गोरे के इस्तीफे की मांग की। वहीं, गोरे ने आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि उन्हें पहले ही अदालत ने बरी कर दिया है।

पश्चिमी महाराष्ट्र के सतारा जिले के मान विधानसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करने वाले भाजपा नेता गोरे ग्रामीण विकास और पंचायती राज मंत्री हैं। आरोपों के बीच गोरे ने इस मुद्दे को फिर से उठाने वालों के खिलाफ विशेषाधिकार हनन का प्रस्ताव लाने की चेतावनी दी और कहा कि वह उनके खिलाफ मानहानि का मामला भी दर्ज कराएंगे।

गोरे के इस्तीफे की मांग ऐसे समय में की गई है, जब एक दिन पहले ही राकांपा नेता धनंजय मुंडे ने इस्तीफा दे दिया। पिछले वर्ष दिसंबर में बीड में सरपंच संतोष देशमुख की हत्या से जुड़े जबरन वसूली के एक मामले में अपने करीबी सहयोगी वाल्मिक कराड की गिरफ्तारी के बाद धनंजय मुंडे को मंत्री पद से इस्तीफा देना पड़ा।

अब नए घटनाक्रमों के तहत विपक्षी दलों ने आरोपों को लेकर गोरे पर निशाना साधा और उनका इस्तीफा मांगा। शिवसेना (उबाठा) नेता संजय राउत ने दावा किया कि गोरे महिला का यौन उत्पीड़न कर रहे थे, जिसके कारण महिला मुंबई में राज्य विधानमंडल परिसर के बाहर धरना देने की योजना बना रही थी।

उन्होंने कहा, “गोरे के बारे में विवरण चौंकाने वाले हैं और राज्य को बदनाम कर रहे हैं…मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को अपने मंत्रियों के कार्यों की जांच करनी चाहिए।”

कांग्रेस नेता विजय वडेट्टीवार ने गोरे का नाम लिए बिना कहा, “विपक्ष पश्चिमी महाराष्ट्र के एक मंत्री का इस्तीफा मांगेगा, जिन पर एक महिला को अपनी आपत्तिजनक तस्वीरें भेजने का आरोप है।”

सामाजिक कार्यकर्ता अंजलि दमानिया ने आरोपों के मद्देनजर गोरे को मंत्रिमंडल से हटाने की मांग की। पत्रकारों से बात करते हुए उन्होंने कहा, “मुझे पता चला है कि गोरे महिला को परेशान कर रहे हैं…।”

भाजपा नेता गोरे पर महिला को 2017 में अश्लील संदेश और अपनी आपत्तिजनक तस्वीरें भेजने का आरोप लगाया गया था। पत्रकारों से बात करते हुए गोरे ने कहा कि उनके खिलाफ 2017 में भारतीय दंड संहिता की धारा 354 (छेड़छाड़) के तहत मामला दर्ज किया गया था, लेकिन निचली अदालत ने उन्हें 2019 में बरी कर दिया था। उन्होंने कहा कि अदालत ने यह भी आदेश दिया था कि जब्त सामग्री को नष्ट कर दिया जाए।

गोरे ने कहा, “मामला छह साल पुराना है और नेताओं को यह ध्यान रखना चाहिए कि वे क्या कहते हैं। जो लोग मेरे खिलाफ आरोप लगा रहे हैं, उनके खिलाफ मैं विशेषाधिकार हनन का प्रस्ताव लाऊंगा और उनके खिलाफ मानहानि का मुकदमा भी दर्ज कराऊंगा।”


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