– व्यंग्य विशेष, समाचार प्रहरी
जब 2015 में प्रधानमंत्री मोदी ने बड़े जोश-ओ-खरोश के साथ “डिजिटल इंडिया” की घोषणा की थी, तब लगा था कि अब भारत माउस के एक क्लिक पर दौड़ेगा। मगर 2025 आ गया, माउस जुबानी वादों का चारा खाकर थक चुका है, क्लिक अटक चुका है, और डिजिटल प्रणाली की रिपोर्ट? वो तो “डेटा सत्यापन के अंतिम चरण” में है – पिछले डेढ़ साल से!
एनसीआरबी, यानी नेशनल क्राइम रिकॉर्ड्स ब्यूरो – जो देशभर के अपराधों का लेखा-जोखा रखती है – उसकी रिपोर्ट्स अब टाइम मशीन से आती हैं शायद। 2022 की रिपोर्ट दिसंबर 2023 में आई, और 2023 की रिपोर्ट अब भी डेटा जांच की “कठिन तपस्या” में लीन है। 2025 में बैठकर पिछली सदी की पारदर्शिता की उम्मीद रखना, खुद में एक अपराध है।
डिजिटल इंडिया का असली जलवा देखिए – राशन कार्ड हो, वोटर आईडी हो या ट्रैफिक चालान या फिर धोखाधड़ी की शिकायत– हर चीज़ ऑनलाइन कर दी गई है, बस जवाबदेही अब भी ऑफ़लाइन है। सरकारी पोर्टल्स पर स्क्रॉल करते रहिए, “under maintenance” की सूचना मिलेगी, जैसे देश की पारदर्शिता भी सर्वर डाउन में चली गई हो।
सरकार कहती है – “हम हर फाइल डिजिटली ट्रैक कर रहे हैं”। सही है, शायद इसी ट्रैकिंग में फंस गई एनसीआरबी की रिपोर्ट, जो अभी तक “Processing…” में अटकी है। 5G आ गया, लेकिन क्राइम डेटा 2G की रफ्तार से भी पीछे है।
आश्चर्य की बात यह है कि सरकार को “कैशलेस इंडिया”, “पेपरलेस इंडिया” सब याद रहता है, बस “जवाबदेही वाला इंडिया” कहीं मिस हो गया है।
और जनता? वो अब NCRB रिपोर्ट्स का इंतजार वैसे ही करती है, जैसे मेट्रो में “Next Station” की घोषणा – आती है, पर कब आएगी, ये कोई नहीं जानता।
सवाल यह नहीं कि रिपोर्ट कब आएगी, सवाल यह है कि डिजिटल इंडिया के इस शानदार थिएटर में असली डाटा कब पर्दे पर आएगा। वरना हर साल नई वेबसाइट, नया ऐप, नया पोर्टल लॉन्च करके सरकार खुद को “टेक्नोलॉजी फ्रेंडली” साबित करती रहेगी, और हम जनता… “Loading Report…” के सस्पेंस में जीते रहेंगे।
