पूर्व सीजेआई बोले—स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व ने भारत को जोड़े रखा
मुख्यमंत्री ने कहा—फैसले संसद में होंगे, संवैधानिक तरीकों से ही मांगें न्याय
✍️ प्रहरी संवाददाता, मुंबई | संविधान और लोकतंत्र की भूमिका तथा सत्ता परिवर्तन के तरीकों पर छिड़ी बहस के बीच पूर्व प्रधान न्यायाधीश बी. आर. गवई और महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने संवैधानिक व्यवस्था को लेकर अहम बयान दिए। गवई ने कहा कि बाहरी हमलों, उग्रवाद और आतंकवाद जैसी चुनौतियों के बावजूद डॉ. बी. आर. आंबेडकर के नेतृत्व में तैयार संविधान ने पिछले 76 वर्षों में भारत को एकजुट रखा और विकास की दिशा में आगे बढ़ने का आधार दिया। वहीं, फडणवीस ने कहा कि संविधान के रहते सत्ता परिवर्तन का एकमात्र रास्ता चुनाव है और देश के फैसले संसद में लिए जाएंगे।
मुंबई में शुक्रवार को बीएमसी की शैक्षणिक पहल के तहत दो मराठी पुस्तकों के विमोचन के दौरान आए ये बयान ऐसे समय महत्वपूर्ण हैं, जब वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण की सत्ता परिवर्तन संबंधी टिप्पणी और मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विरोध प्रदर्शनों को लेकर बहस जारी है।
गवई ने भारतीय संविधान को स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व के सिद्धांतों पर आधारित बताते हुए कहा कि स्वतंत्रता का अधिकार दूसरों की स्वतंत्रता के हनन का आधार नहीं बन सकता। उन्होंने कहा कि 1950 में संविधान लागू होने के बाद देश ने बड़े राजनीतिक, सामाजिक और आर्थिक बदलाव देखे, लेकिन बाहरी हमलों तथा उग्रवाद और आतंकवाद जैसी आंतरिक चुनौतियों के बावजूद भारत की एकता कायम रही। नेपाल, बांग्लादेश, पाकिस्तान और श्रीलंका के घटनाक्रमों का उल्लेख करते हुए उन्होंने देश को एकजुट रखने का श्रेय संविधान और उसके निर्माण में डॉ. आंबेडकर तथा उनके सहयोगियों के योगदान को दिया।
मुख्यमंत्री फडणवीस ने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में संविधान और लोकतंत्र को नुकसान पहुंचाने के प्रयास हुए, लेकिन देश का संवैधानिक ढांचा मजबूत बना रहा। प्रशांत भूषण की सत्ता परिवर्तन संबंधी टिप्पणी के संदर्भ में उन्होंने कहा कि फैसले संसद में होंगे और सत्ता परिवर्तन केवल चुनाव के माध्यम से होगा। उन्होंने लोगों से संवैधानिक तरीकों से न्याय मांगने की अपील करते हुए कहा कि संविधान के विरुद्ध काम करने वालों से निपटने के प्रावधान भी उसमें मौजूद हैं।
बता दें कि प्रशांत भूषण ने पिछले दिनों को एसआईआर प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं के खिलाफ जारी विरोध प्रदर्शनों के बीच सत्ता परिवर्तन का आह्वान किया था और इसे नागरिकों का लोकतांत्रिक अधिकार बताया था। इसी पृष्ठभूमि में फडणवीस की टिप्पणी आई है।
