✍🏻 डिजिटल न्यूज़ डेस्क, नई दिल्ली | अमेरिका–लैटिन अमेरिका संबंधों के इतिहास में शनिवार की रात एक असाधारण और उथल-पुथल भरा मोड़ लेकर आई। अमेरिका ने वेनेज़ुएला में सैन्य कार्रवाई कर वहां के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को हिरासत में लेने का दावा किया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने सोशल मीडिया पर लिखा कि मादुरो और उनकी पत्नी सिलिया फ्लोरेस अब अमेरिकी सेना के नियंत्रण में हैं और उन्हें न्यूयॉर्क लाया जा रहा है। इस दावे के साथ ही वैश्विक कूटनीति में हलचल तेज हो गई।
अमेरिकी मीडिया नेटवर्क CNN ने अधिकारियों के हवाले से बताया कि ऑपरेशन के दौरान मादुरो को उनके आवास के बेडरूम से बाहर निकाला गया। रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रम्प स्वयं इस पूरे सैन्य ऑपरेशन की लाइव मॉनिटरिंग कर रहे थे। भारतीय समयानुसार शनिवार सुबह करीब 11:30 बजे अमेरिका ने वेनेज़ुएला के चार शहरों में लक्षित हमले किए, जिनमें सैन्य ठिकानों और रणनीतिक प्रतिष्ठानों को निशाना बनाया गया। राजधानी काराकास समेत कई इलाकों में सात धमाकों की आवाज़ें कई किलोमीटर दूर तक सुनी गईं।
हमलों के तुरंत बाद वेनेज़ुएला में इमरजेंसी घोषित कर दी गई थी। मादुरो सरकार की ओर से जवाबी कार्रवाई के संकेत दिए गए थे, लेकिन उसके एक घंटे के भीतर ही ट्रम्प का ‘गिरफ्तारी दावा’ सामने आ गया। ट्रम्प ने घोषणा की है कि वह इस पूरे घटनाक्रम पर विस्तृत जानकारी देने के लिए प्रेस कॉन्फ्रेंस करेंगे।
इस कार्रवाई ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर तीखी प्रतिक्रिया पैदा कर दी है। रूस ने इसे किसी संप्रभु राष्ट्र पर सीधा हमला बताते हुए अंतरराष्ट्रीय क़ानून की खुली अवहेलना कहा है। चीन ने अमेरिकी बल प्रयोग की कड़ी निंदा की है। ब्रिटेन ने खुद को इस ऑपरेशन से अलग बताया, जबकि अर्जेंटीना ने अमेरिकी कार्रवाई का समर्थन किया। वेनेज़ुएला ने तत्काल संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की आपात बैठक बुलाने की मांग की है। उधर संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने हालात को क्षेत्रीय स्थिरता के लिए गंभीर खतरा बताया है।
मादुरो पर ड्रग तस्करी के आरोपों और अरबों रुपये के इनाम की पृष्ठभूमि में यह घटनाक्रम अब केवल द्विपक्षीय टकराव नहीं, बल्कि वैश्विक शक्ति संतुलन की अग्निपरीक्षा बनता दिख रहा है।
