आत्मनिर्भर भारत को बूस्ट: सेना के लिए 4.25 लाख कार्बाइन, नौसेना को ब्लैक शार्क टॉरपीडो
✍🏻 डिजिटल न्यूज़ डेस्क, मुंबई/नई दिल्ली | भारत ने अपनी थल और नौसैनिक ताकत को निर्णायक बढ़त देने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। रक्षा मंत्रालय ने मंगलवार को करीब 4,666 करोड़ रुपये की दो अहम डिफेंस डील को मंजूरी देकर सेना और नौसेना के आधुनिकीकरण को रफ्तार दी। एक ओर जहां 4.25 लाख से अधिक क्लोज-क्वार्टर बैटल (CQB) कार्बाइन की खरीद से जमीनी युद्ध क्षमता मजबूत होगी, वहीं दूसरी ओर स्कॉर्पीन/कलवरी-क्लास पनडुब्बियों के लिए 48 अत्याधुनिक हैवी वेट टॉरपीडो नौसेना की मारक क्षमता को कई गुना बढ़ाएंगे।
मंत्रालय ने इसे ‘आत्मनिर्भर भारत’ और ‘मेक-इन-इंडिया’ के लिए मील का पत्थर बताया है। इन अनुबंधों पर नई दिल्ली स्थित साउथ ब्लॉक में रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह की मौजूदगी में हस्ताक्षर किए गए। सेना और नौसेना के लिए 2,770 करोड़ रुपये की CQB कार्बाइन डील भारत फोर्ज लिमिटेड और PLR Systems (अडानी डिफेंस व IWI का संयुक्त उद्यम) के साथ हुई है।
समझौते के अनुसार, कार्बाइनों का 60% उत्पादन भारत फोर्ज करेगा, जबकि शेष निर्माण PLR Systems द्वारा किया जाएगा। इन हथियारों की आपूर्ति अगले पांच वर्षों में चरणबद्ध तरीके से पूरी होगी।
रक्षा मंत्रालय के अनुसार, ये आधुनिक CQB कार्बाइन पुराने हथियारों की जगह लेंगी और शहरी व संकरी जगहों में ऑपरेशंस के लिए बेहद प्रभावी होंगी। हल्का वजन, कॉम्पैक्ट डिजाइन और तेज फायर रेट इन्हें आधुनिक युद्ध की जरूरतों के अनुरूप बनाते हैं। यह डील सरकारी-निजी साझेदारी को मजबूती देने के साथ घरेलू रक्षा उद्योग को भी बड़ा प्रोत्साहन देगी।
इसी कड़ी में नौसेना के लिए 1,896 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत से इटली की WASS Submarine Systems S.R.L. से 48 ‘ब्लैक शार्क’ हैवी वेट टॉरपीडो खरीदे जाएंगे। ये टॉरपीडो नौसेना की छह कलवरी-क्लास पनडुब्बियों में तैनात किए जाएंगे। उनकी डिलीवरी अप्रैल 2028 से शुरू होकर 2030 की शुरुआत तक पूरी होने की संभावना है। रक्षा मंत्रालय का कहना है कि उन्नत तकनीक से लैस ये टॉरपीडो समुद्र के भीतर भारत की रणनीतिक बढ़त को और मजबूत करेंगे।
