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62 हजार करोड़ का ‘करंट’!

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बिहार में बिजली खरीद पर बीजेपी के पूर्व मंत्री का बड़ा आरोप, अडानी पावर ने बताया ‘गुमराह करने वाला’

✍🏻 प्रहरी डिजिटल डेस्क, पटना | बिहार की सियासत में एक बार फिर बिजली का झटका लगा है। बीजेपी के पूर्व केंद्रीय ऊर्जा मंत्री और आरा से पूर्व सांसद आरके सिंह ने नीतीश कुमार सरकार पर 62,000 करोड़ रुपये के बिजली घोटाले का गंभीर आरोप लगाया है। आरके सिंह के निशाने पर इस बार भागलपुर की पीरपैंती थर्मल परियोजना है, जिसका ठेका अडानी पावर को मिला है।

आरके सिंह का कहना है कि जब वे ऊर्जा मंत्री थे, तब इस 2,400 मेगावाट की परियोजना की लागत करीब 24,900 करोड़ रुपये (यानी 10 करोड़ रुपये प्रति मेगावाट) तय की गई थी। लेकिन मौजूदा नीतीश सरकार ने इसे 15 करोड़ रुपये प्रति मेगावाट की दर से मंजूरी दी। यानी हर यूनिट बिजली 2.75 रुपये की बजाय 4.16 रुपये में खरीदी जाएगी। सिंह के मुताबिक, इससे बिहार के खजाने पर हर साल 2,500 करोड़ रुपये का अतिरिक्त बोझ पड़ेगा और 25 साल में कुल नुकसान 62,000 करोड़ रुपये का होगा।

उन्होंने तंज कसते हुए कहा, “अगर मैं गलत हूं तो नीतीश सरकार मुझे सही कर दे, लेकिन सात साल तक ऊर्जा मंत्री रहने के अनुभव से कह सकता हूं कि यह सौदा जांच के लायक है।”

वहीं, अडानी पावर ने आरके सिंह के आरोपों को पूरी तरह “झूठा और भ्रामक” बताया है। कंपनी ने कहा कि बिहार सरकार ने परियोजना को पूरी पारदर्शिता के साथ मंजूरी दी है और कुछ लोग राजनीतिक निराशा में झूठ फैलाने की कोशिश कर रहे हैं।

उधर, बिहार के उद्योग मंत्री नीतीश मिश्रा से संपर्क करने की कोशिशें नाकाम रहीं। फिलहाल, बिहार की सियासत में ‘पावर प्लांट’ से ज्यादा ‘पावर पॉलिटिक्स’ गर्म हो गई है।


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