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हरिदास पट्टी में दबंगई: “सरकार हमारी है, पुलिस जेब में है”

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  • जातिवाद और भूमाफिया गठजोड़ पर खामोश प्रशासन

  • जातिवादी चौकी इंचार्ज बना दबंगों का सहायक, पीड़ित परिवार बेहाल

✍🏻 प्रहरी संवाददाता, जौनपुर। उत्तर प्रदेश में भाजपा सरकार कानून-व्यवस्था और सर्वजन हिताय की बड़ी-बड़ी बातें करती है, लेकिन जमीनी हकीकत इससे बिलकुल अलग तस्वीर पेश करती है। जौनपुर जिले के बदलापुर थाना क्षेत्र की घनश्यामपुर पुलिस चौकी का हाल ऐसा है कि वहां का चौकी इंचार्ज खुलेआम जातिवादी रवैया अपनाते हुए दबंगों के पक्ष में खड़ा दिखाई देता है। हरिदास पट्टी गांव में तिवारी परिवार द्वारा जबरन रास्ता बंद कर आबादी भूमि पर कब्जा करने की घटना ने पूरे क्षेत्र में तनाव की स्थिति पैदा कर दी है।

स्थानीय लोगों का आरोप है कि तिवारी परिवार खुलेआम धमकी देता है—“सरकार हमारी है, पुलिस हमारी जेब में है।” यादव परिवार की महिलाओं तक को गाली-गलौज और धमकी दी गई। पीड़ित परिवार की ओर से बार-बार शिकायतों के बावजूद पुलिस न सिर्फ मूकदर्शक बनी हुई है, बल्कि आरोप है कि चौकी इंचार्ज शिकायतकर्ताओं को ही डराकर चुप करा देता है और दबंगों की मदद करता है। बदलापुर के पूर्व थानेदार ने भी पीड़ित परिवार को जेल में डालने की धमकी दी थी, जो फिलहाल थाने में अश्लील डांस कराने के मामले में निलंबित किए गए हैं।

मामला गाटा संख्या 285 की आबादी भूमि का है। दशकों से यादव परिवार इस भूमि पर वैध कब्जा कर सामाजिक-सांस्कृतिक आयोजन करता आया है। यही नहीं, इसी भूमि से होकर पश्चिमी चकरोड मार्ग से ग्रामीण और किसान अपने खेतों तक जाते हैं। लेकिन अब तिवारी परिवार ने जबरन कब्जे की कोशिश करते हुए चारों तरफ तार लगाकर रास्ता बंद कर दिया है। इससे न सिर्फ प्रार्थी परिवार के आवागमन पर रोक लगी है, बल्कि उनकी धार्मिक व सामाजिक स्वतंत्रता भी खतरे में पड़ गई है।

पीड़ित परिवार लगातार तीन महीने से जनसुनवाई पोर्टल पर आवेदन करता रहा है (रेफरेंस क्रमांक 40019425056862, 40019425056853, 40019425025532, 40015524060288), लेकिन प्रशासन और राजस्व विभाग ने आंख मूंद ली है। नतीजा यह है कि भारतीय दंड संहिता की धारा 441, 425, 503, 506 और 120बी, साथ ही उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता की धारा 28, 106 और 143 तथा संविधान के अनुच्छेद 19(1)(d), 21 और 300A का घोर उल्लंघन होने के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं की गई।

गांव वालों का कहना है कि अगर जिलाधिकारी यानी डीएम साहब और पुलिस अधीक्षक यानी एसपी साहब खुद भी आम नागरिक बनकर इस चौकी पर शिकायत दर्ज कराने जाएं और सामने वाला पक्ष किसी ब्राह्मण परिवार से जुड़ा हो, तो यह जातिवादी दारोगा उन्हें भी जेल भेज देगा—क्योंकि उसके पास “151” का हथियार है।

यादव परिवार का कहना है कि अगले दो महीने में उनके यहां शादी का कार्यक्रम है, लेकिन परिवार भय और असमंजस में जी रहा है। अगर किसी सदस्य के साथ अनहोनी होती है, तो इसकी जिम्मेदारी सीधे पुलिस, प्रशासन और स्थानीय भाजपा सरकार पर होगी, जिसने जातिवाद और भूमाफियाओं के गठजोड़ को संरक्षण दे रखा है।

जौनपुर जिले के हरिदास पट्टी गांव में तिवारी परिवार की दबंगई और प्रशासन की चुप्पी यह सवाल खड़ा करती है कि क्या भाजपा सरकार में न्याय सिर्फ दबंगों और जातिवादियों के लिए है? जब आम आदमी अपनी आबादी भूमि और रास्ते की सुरक्षा के लिए तरस रहा है, तब “सबका साथ, सबका विकास” सिर्फ एक जुमला बनकर रह गया है।

 


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