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सरकार कहती है- लोग खुल कर खर्च कर रहे हैं, शहरों में प्रति व्यक्ति का मासिक खर्च 7000 रुपये है

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10 साल में अरबपतियों की संख्या में तीन गुना की बढ़ोतरी
21 फीसदी आबादी भारत में रहती है

प्रहरी संवाददाता, मुंबई। पूंजीपतियों की कट्टर समर्थक केंद्र की बीजेपी सरकार के शासन काल में देश में आर्थिक असमानताएं किस तरह तेजी से बढ़ी हैं, यह सांख्यिकी मंत्रालय की रिपोर्ट पढ़ कर आसानी से समझा जा सकता है। देश में जहां अरबपतियों की दौलत में 42 फीसदी का इजाफा हुआ है, तो वहीं शहरी और ग्रामीण इलाकों में गरीबों की संख्या भी बेतहाशा बढ़ी है। सरकार की रिपोर्ट कहती है कि ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में लोग खुल कर खर्च कर रहे हैं, उनकी औसत प्रति व्यक्ति मासिक व्यय क्रमशः 4,122 रुपये और 6,996 रुपये है।

अरबपतियों की दौलत में 42 फीसदी का इजाफा

हुरुन रिच लिस्ट 2024 के अनुसार, भारत में अरबपतियों की संख्या पिछले 10 साल में तीन गुना बढ़कर 334 हो गई है, तो वहीं देश के 1,500 से ज़्यादा अमीरों की कुल संपत्ति 1,000 करोड़ रुपये या उससे ज़्यादा है। भारत में अरबपतियों की संख्या भी बढ़कर 185 हो गई है। अमेरिका और चीन के बाद यह सबसे अधिक संख्या है। इतना ही नहीं, पिछले एक साल के भीतर इन अरबपतियों की दौलत में 42 फीसदी का इजाफा हुआ है।

क्या कहती है सांख्यिकी मंत्रालय की रिपोर्ट

सांख्यिकी मंत्रालय ने शुक्रवार को एक सर्वे रिपोर्ट जारी की है। इसमें खुलासा हुआ है कि शहरी क्षेत्रों में खपत में कमी आई है। सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय ने कोविड-19 महामारी के बाद स्थिति सामान्य होने पर वर्ष 2022-23 और 2023-24 के दौरान घरेलू उपभोग व्यय पर दो सर्वेक्षण किए हैं। पहला सर्वेक्षण अगस्त 2022 से जुलाई 2023 की अवधि के दौरान किया गया था। फरवरी 2024 में फैक्ट शीट जारी किया गया। सर्वेक्षण की विस्तृत रिपोर्ट और इकाई स्तर के डेटा जून 2024 में जारी हुए हैं।

इस रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2023-24 में ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में औसत एमपीसीई क्रमशः 4,122 रुपये और 6,996 रुपये रहने का अनुमान लगाया गया है, जिसमें विभिन्न सामाजिक कल्याण कार्यक्रमों के माध्यम से परिवारों को प्राप्त हुई नि:शुल्‍क वस्तुओं के मूल्यों को शामिल नहीं किया गया है।

 

संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट कहती है

संयुक्त राष्ट्र ने हाल ही में “वैश्विक बहुआयामी गरीबी सूचकांक 2024” की रिपोर्ट जारी की है, जिसमें कहा गया है कि भारत में सबसे अधिक गरीब रहते हैं। रिपोर्ट के अनुसार, पूरी दुनिया में जहां 110 करोड़ लोग बहुआयामी गरीबी में जीवन काट रहे हैं, तो वहीं 23.4 करोड़ भारतीय यानी बहुआयामी गरीबी से जूझ रही 21 फीसदी आबादी भारत में रहती है। यह रिपोर्ट तीन प्रमुख आयामों पोषण, शिक्षा और जीवन स्तर पर आधारित है। बहुआयामी गरीबी से जूझ रही यह आबादी बुनियादी सेवाओं से वंचित है।

 


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