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डॉक्‍टरी की पढ़ाई करने चीन जा रहे, जरा संभलकर! भारत में 16% छात्र ही सफल

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@ उमेश यादव, नागपुर | भारत में हर साल लाखों विद्यार्थी मेडिकल कॉलेजों में प्रवेश के लिए परीक्षा देते हैं। सफल विद्यार्थियों को मेडिकल कॉलेजों में प्रवेश मिल जाता है, लेकिन परीक्षा में विफल होने के बाद इनमें से अधिकांश विद्यार्थी मेडिकल कॉलेजों में प्रवेश के लिए विदेश का रुख करते हैं। अधिकांश विद्यार्थी चीन के मेडिकल कॉलेज में एडमिशन ले लेते हैं।

उल्लेखनीय है कि विदेशों से मेडिकल कोर्स पूरा होने के बाद भारत में डॉक्‍टरी की प्रैक्टिस करने के लिए विद्यार्थियों को कड़े नियमों का पालन करना पड़ता है। एक रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2015 से वर्ष 2021 तक चीन के 45 मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालयों से क्लिनिकल मेडिकल पाठ्यक्रमों की पढ़ाई करनेवाले हजारों विद्यार्थियों में से केवल 16 प्रतिशत विद्यार्थी ही पास हो सके हैं।

वर्तमान में विभिन्न चीनी विश्वविद्यालयों में 23 हजार से ज्यादा भारतीय विद्यार्थी पढ़ रहे हैं। भारत में प्रैक्टिस के लिए वर्ष 2015 से 2021 के दौरान 40,417 विद्यार्थियों में से केवल 6,387 विद्यार्थियों ने मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया की विदेशी चिकित्सा स्नातक (एफएमजी) परीक्षा पास की है, जबकि चीन से मेडिकल की पढ़ाई करनेवाले 16 पर्सेंट विद्यार्थी ही सफल हो पाए हैं।

एक एडवाइजारी के मुताबिक, विद्यार्थियों को परीक्षा उत्तीर्ण होने के कम प्रतिशत, चीन की आधिकारिक भाषा पुतोंग्हुआ सीखने की बाध्यता और भारत में चिकित्सक के तौर पर प्रैक्टिस करने के कड़े नियमों के बारे में बताया गया है। कई विद्यार्थी बिना पूरी जानकारी हासिल किए ही चीन के मेडिकल कॉलेज में दाखिला ले लेते हैं। बाद में उन्‍हें कई दिक्कतों से गुजरना होता है।


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