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करोड़ों की हेराफेरी मामले में ईडी ने एक आरोपी को किया गिरफ्तार

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मुंबई। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने साई चंद्रशेखर को धन शोधन रोकथाम अधिनियम 2002 (पीएमएलए) के तहत मनी लॉन्ड्रिंग के अपराध में शामिल होने के आरोप में गिरफ्तार किया है। आरोपी को नई दिल्ली स्थित साकेत जिला और सत्र न्यायालय के समक्ष पेश किया गया। ईडी ने आरोपी की सात दिनों की रिमांड मांगी थी, जिसे कोर्ट ने स्वीकार कर लिया।

इससे पहले, ईडी ने 23 अक्टूबर 2020 को पीएमएलए की धारा 17 के तहत साई चंद्रशेखर के आवासीय और कार्यालय परिसर में तलाशी की थी। पीएमएलए के तहत जांच से पता चला है कि वीरकरण अवास्टी ने अन्य निदेशकों के साथ मिलकर गलत तरीके से इन्वेंट्री बनाई और कंपनी के वित्तीय नतीजों में छेड़छाड़ करते हुए फर्जी स्टॉक बनाए  और साजिश रचकर हासाद नीदरलैंड कंपनी को धोखा दिया। हासाद फ़ूड कंपनी की सहायक कंपनी मेसर्स हासाद नीदरलैंड्स बी वी को हासाद फ़ूड्स ओवरसीज़ प्राइवेट लिमिटेड के निदेशकों वीरकरण अवास्टी और रितिका अवास्टी ने स्टॉक व इन्वेंट्री के स्तर को गलत तरीके से प्रस्तुत करते हुए 120 मिलियन अमरीकी डॉलर (लगभग 750 करोड़ रुपये) की धनराशि की चपत लगाई थी।

मेसर्स बुश फूड्स ओवरसीज़ प्राइवेट के बीच व्यापार लेनदेन में भी दोनों की महत्वपूर्ण भूमिका रही। इस काम के लिए कंपनी की ओर से साईं चंद्रशेखर ने पहले वीरकरण अवास्टी को 20.79 करोड़ रुपये अवैध तरीके से भुगतान किया। साई चंद्रशेखर ने इंदिरानगर में 5.8 करोड़ रुपये मूल्य की एक संपत्ति खरीदी थी। यह रकम वीरकरण अवास्टी ने अपनी कंपनी से हस्तांतरित की थी। इसके अलावा, साईं चंद्रशेखर ने अपने पिता और मां के बैंक खाते में एक करोड़ रुपये जमा कराए थे, जिसे उसने अपने पिता के चिकित्सा उपचार के लिए खर्च कर दिया।

जांच में यह भी सामने आय़ा कि साई चंद्रशेखर को वीरकरण अवास्टी की दुबई स्थित कंपनी मेसर्स हैरिन वेंचर्स लिमिटेड के जरिए 13.79 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया। बंगलौर और मुंबई में साई चंद्रशेखर ने कई संपत्तियों को खरीदा। इसके साथ ही 7 करोड़ रुपये उसके बैंक खाते में बरामद हुई। ईडी ने पीएमएलए के तहत आरोपी की चल – अचल संपत्ति को पहले ही अटैच कर लिया है।

ईडी ने पीएमएलए के तहत वीरकरण अवास्टी, विनोद सिरोही और केपीएमजी इंडिया प्राइवेट लिमिटेड के खिलाफ जांच शुरू की है। दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा की ओर से आईपीसी की धारा 409, 420 और 120 बी के तहत दर्ज की गई एफआईआर के आधार पर ईडी ने भी जांच शुरू की थी। इस मामले में हासाद नीदरलैंड बी.वी. ने शिकायत दर्ज कराई थी। पुलिस ने आरोपयों के खिलाफ आरोप पत्र दायर किया था।


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