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जीएसटी काउंसिल की बैठक: 2022 के बाद भी लगेगा कम्पेनसेशन सेस!

2022 के बाद भी लगेगा कम्पेनसेशन सेस!
जीएसटी काउंसिल का बड़ा निर्णय
 
नई दिल्ली। वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) काउंसिल की सोमवार को हुई बैठक में एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया है। सूत्रों के मुताबिक यह तय हुआ है कि लग्जरी और कई अन्य तरह की वस्तुओं पर लगने वाले कम्पेनसेशन सेस को जून 2022 से भी आगे बढ़ाया जाएगा। राज्यों को नुकसान से बचाने के लिए यह निर्णय लिया गया है। पांच साल तक यह उपकर लगाने का निर्णय लिया गया था। लेकिन सरकार ने अब दो साल तक इस अवधि को बढाने का फैसला लिया है।

पांच साल तक लगना था यह उपकर
गौरतलब है कि मुआवजे के लिए केंद्र सरकार के विकल्प को  सिर्फ 20 राज्यों और एक केंद्र शासित प्रदेश ने स्वीकार किया है। कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों के शासन वाले ज्यादातर राज्यों ने केंद्र की पेशकश को ठुकरा दिया है। केंद्र ने आश्वासन दिया था कि इस उधारी को चुकाने के लिए लग्जरी और कई अन्य तरह की वस्तुओं पर लगने वाले कम्पेनसेशन सेस को वर्ष 2022 से भी आगे बढ़ा दिया जाएगा। नियम के मुताबिक यह जीएसटी लागू होने के बाद सिर्फ पांच साल तक लगना था।

सरकार ने जीएसटी मुआवजे की राशि अन्यत्र खर्च किया
उल्लेखनीय है कि जीएसटी व्यवस्था के कार्यान्वयन के पहले दो साल में जीएसटी मुआवजे की 47,272 करोड़ रुपये की राशि को गलत तरीके से रोककर कानून का उल्लंघन किया है। नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) की रिपोर्ट में यह खुलासा किया गया है। राज्य सरकार करीब 2.35 लाख करोड़ रुपये का जीएसटी बकाया के तहत मुआवजा देने की केंद्र सरकार से मांग कर रहे हैं। इसके बदले में केंद्र ने उन्हें उधार लेने के दो विकल्प दिये हैं, लेकिन केंद्र की इस पेशकश को लेकर राज्य बंटे हुए हैं।

क्या है मुआवजे का गणित
राज्यों का करीब 2.35 लाख करोड़ रुपये का जीएसटी मुआवजा बकाया है। लेकिन केंद्र सरकार का गणित यह है ​कि इसमें से करीब 97,000 करोड़ रुपये का नुकसान ही जीएसटी लागू होने की वजह से है। इसके अलावा करीब 1.38 लाख करोड़ रुपये का राजस्व नुकसान कोरोना महामारी और लॉकडाउन की वजह से हुआ है।

केंद्र ने दिये हैं दो विकल्प
अगस्त महीने में केंद्र सरकार ने राज्यों को इस संकट से निपटने के लिए दो विकल्प दिये थे। पहला विकल्प यह था कि वे 97,000 करोड़ रुपया एक खास विंडो से उधार लें, जिसकी व्यवस्था रिजर्व बैंक करेगा। दूसरा विकल्प यह है कि वे पूरे 2.35 लाख करोड़ रुपये की रकम को उधार लें।

सरकार के फैसले का  राज्यों ने किया विरोध
केंद्र सरकार के प्रस्ताव का विरोध करने वाले राज्यों में दिल्ली, केरल, पश्चिम बंगाल, तेलंगाना, छत्तीसगढ़, तमिलनाडु शामिल हैं। राज्य सरकारों ने इसके विरोध में केंद्र सरकार को लेटर लिखकर कहा है कि जीएसटी को लाने वाले संविधान संशोधन के मुताबिक केंद्र सरकार राज्यों को मुआवजा देने के लिए बाध्य है। केंद्र सरकार को तत्काल जीएसटी मुआवजा राशि का भुगतान कर देना चाहिए।

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