हाइलाइट्स
- महाकुंभ के बाद काशी में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी
- मंदिरों के बाहर जूते-चप्पलों का पहाड़, नगर निगम सक्रिय
- 70 गाड़ी जूते-चप्पल करसड़ा कूड़ा प्लांट भेजे गए
डिजिटल न्यूज डेस्क, वाराणसी। देश में इतना पाखंड और अंधश्रद्धा है कि लोग धार्मिक आयोजनों से भी कोई सबक नहीं ले रहे हैं। वाराणसी में गंगा और यमुना के घाटों पर लोग कपड़े और चप्पल छोड़ कर चले गए हैं। यह समझने की जरूरत है कि पुराने कपड़े या चप्पल छोड़ कर जाने से किसी प्रकार से पुण्य की प्राप्ति नहीं होती है, लेकिन अंध विश्वास में लोग ऐसा करते हैं। महाकुंभ के दौरान श्रद्धालुओं द्वारा मंदिरों के बाहर सड़क और गलियों में छोड़े गए जूते-चप्पलों का पहाड़ हटाने के लिए नगर निगम की कई टीमें सक्रिय रहीं। महाकुंभ में चप्पल-जूते ढूंढते-ढूंढते लोग थक जा रहे थे। हजारों के ढेर में चप्पल-जूतों की अपनी जोड़ी खोजना बड़ा चैलेंज था।
बता दें कि महाकुंभ के दौरान प्रयागराज में लोगों की काफी भीड़ रही। प्रशासन भीड़ नियंत्रण कर पाने में नाकाम रहा। महाकुंभ के दौरान भगदड़ की कई घटनाएं हुईं। कई लोग मारे गए, लोगों के सामान तक छूट गए। इसके अलावा, अंधविश्वास के चलते लोग पुराने कपड़े और चप्पल तक छोड़ कर चले गए।
प्रशासन की ओर से बताया गया कि मंदिरों के बाहर से औसतन प्रतिदिन दो कूड़ा गाड़ी (मिनी ट्रक) में भरकर जूते और चप्पलों को हटवाया गया। कुल 70 गाड़ी जूते-चप्पल हटवाकर उसे करसड़ा कूड़ा प्लांट में भेजा गया है। मंदिरों के बाहर अतिरिक्त कर्मचारी लगाकर तीन शिफ्टों में साफ-सफाई का यह काम चलता रहा।
उधर, महाशिवरात्रि पर गंगा स्नान के लिए आए श्रद्धलुओं द्वारा घाटों पर छोड़ दिए गए कई टन कपड़े, पॉलिथिन के पैकेट इत्यादि को नगर निगम की टीम के साथ नमामि गंगे से जुड़े कार्यकर्ताओं ने हटवाया। महाशिवरात्रि के दौरान प्रयागराज में डुबकी लगाने के बाद करीब तीन करोड़ श्रद्धालु काशी पहुंचे। इस दौरान काशी विश्वनाथ मंदिर और काशी के कोतवाल कालभैरव मंदिर में दर्शन-पूजन को रेला चलता रहा।

