✍🏻 डिजिटल न्यूज़ डेस्क, नई दिल्ली, सना/रियाद | मध्य पूर्व के दो प्रमुख गल्फ देश सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के बीच पुरानी साझेदारी अब खुली दुश्मनी में बदल चुकी है। शुक्रवार को सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन ने यमन के हदरामौत प्रांत में यूएई-समर्थित दक्षिणी संक्रमणकालीन परिषद यानी साउदर्न ट्रांजिशनल काउंसिल (एसटीसी) के कैंपों पर हवाई हमले किए। इन हमलों में कम से कम 20 एसटीसी लड़ाके मारे गए और कई घायल हुए। सऊदी एयर फोर्स ने दो सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया, जिसमें वाहन और कैंप तबाह हो गए।
यह घटना यमन के 2015 से चल रहे गृहयुद्ध की पृष्ठभूमि में हुई है, जहां सऊदी और यूएई ने ईरान-समर्थित हूती विद्रोहियों के खिलाफ गठबंधन बनाया था। दोनों ने मिलकर हवाई हमले, सैन्य सहायता और दक्षिणी यमन पर नियंत्रण किया। लेकिन हाल के वर्षों में मतभेद गहरा गए। सऊदी पूरे यमन को एकीकृत रखना चाहता है, जबकि यूएई दक्षिणी यमन की स्वतंत्रता के पक्षधर है। यूएई ने एसटीसी को हथियार, प्रशिक्षण और समर्थन देकर हदरामौत और महरा प्रांतों पर कब्जा करवाया, जो तेल समृद्ध क्षेत्र हैं। इससे सऊदी-समर्थित राष्ट्रीय शील्ड फोर्सेस को हाशिए पर धकेल दिया गया।
तनाव की जड़ें 30 दिसंबर को मुकल्ला बंदरगाह पर सऊदी के हमले से जुड़ी हैं, जहां यूएई के दो जहाजों पर एसटीसी को हथियार पहुंचाने का आरोप लगा। सऊदी ने यूएई को 24 घंटे का अल्टीमेटम दिया था कि वह सैनिक हटाए और एसटीसी समर्थन बंद करे।
यूएई ने विदड्रॉल की घोषणा की, लेकिन हमले के बाद एसटीसी प्रवक्ता ने इसे “युद्ध की घोषणा” बताया। उन्होंने सऊदी पर मुस्लिम ब्रदरहुड, अल-कायदा और हूतियों से सांठगांठ का आरोप लगाया।
यूएई ने सऊदी पर “धोखा” का इल्जाम लगाते हुए डी-एस्केलेशन की अपील की थी। यमन की राष्ट्रपति परिषद ने यूएई के साथ संयुक्त रक्षा संधि रद्द कर दी।
सऊदी राजदूत ने एसटीसी प्रमुख पर अदन में मध्यस्थता रोकने का आरोप लगाया। दोनों तेल उत्पादक देशों का यह विवाद रेड सी क्षेत्र, हूती गतिविधियों और वैश्विक ऊर्जा बाजार को प्रभावित कर सकता है। एसटीसी ने सऊदी-समर्थित सेनाओं के खिलाफ “निर्णायक लड़ाई” की चेतावनी दी है।
