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राहुल गांधी की विदेश यात्रा पर निगरानी? सैम पित्रोदा के दावे से सियासी हलचल

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✍🏻 डिजिटल न्यूज़ डेस्क, नई दिल्ली | इंडियन ओवरसीज कांग्रेस (IOC) के अध्यक्ष और वरिष्ठ कांग्रेस नेता सैम पित्रोदा के एक बयान ने राजनीतिक हलकों में हलचल मचा दी है। एक मीडिया इंटरव्यू में पित्रोदा ने दावा किया कि लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी के विदेश दौरों के दौरान उनकी गतिविधियों पर नजर रखी जाती है। यह टिप्पणी राहुल गांधी के हालिया जर्मनी दौरे के संदर्भ में आई है, जिसकी पहली तस्वीर भी पित्रोदा ने ही सार्वजनिक की थी।
पित्रोदा के मुताबिक, जब भी राहुल गांधी विदेश यात्रा पर होते हैं, तो संबंधित भारतीय दूतावास के अधिकारी उनकी गतिविधियों पर निगरानी रखते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ मामलों में विदेशी नेताओं को राहुल गांधी से मुलाकात न करने या दूरी बनाए रखने की सलाह तक दी जाती है। पित्रोदा ने कहा कि यह केवल सुरक्षा प्रोटोकॉल तक सीमित नहीं रहता, बल्कि राजनीतिक स्तर पर निगरानी जैसा प्रतीत होता है।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि विदेश यात्राएं अचानक तय नहीं होतीं। जर्मनी यात्रा को लेकर उठे सवालों पर पित्रोदा ने कहा कि ऐसे कार्यक्रम महीनों पहले तय होते हैं और अंतरराष्ट्रीय बैठकों की समय-सारिणी पहले से निर्धारित रहती है। उनके अनुसार, संसद सत्र के दौरान विदेश जाना कोई असामान्य बात नहीं है।
पित्रोदा ने दावा किया कि उन्होंने स्वयं कई मौकों पर दूतावास से जुड़े लोगों को होटल, बैठकों और एयरपोर्ट पर राहुल गांधी की मौजूदगी पर नजर रखते देखा है। हालांकि, उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि उनके पास इस संबंध में कोई लिखित प्रमाण नहीं है और यह उनके व्यक्तिगत अनुभवों पर आधारित दावा है। इसके बावजूद उन्होंने इसे “सरकारी स्तर पर जासूसी जैसी प्रवृत्ति” करार दिया।
इंटरव्यू में पित्रोदा ने भारत के मौजूदा लोकतांत्रिक हालात, संस्थानों के कथित दुरुपयोग और राजनीतिक दबाव जैसे मुद्दों पर भी अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी का जर्मनी दौरा एक वैश्विक प्रगतिशील राजनीतिक सम्मेलन से जुड़ा था, जिसमें 100 से अधिक देशों के दलों ने हिस्सा लिया।
भाजपा द्वारा राहुल गांधी पर लगाए जाने वाले देशविरोधी बयानों के आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए पित्रोदा ने कहा कि सच चाहे देश में बोला जाए या विदेश में, उसका स्वरूप नहीं बदलता। उनके मुताबिक, वैश्विक मंचों पर कही गई बातों को भी भारतीय लोकतंत्र के व्यापक संदर्भ में देखा जाना चाहिए।


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