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“वोट खरीदना लोकतंत्र का अपमान”; मंत्री की स्वीकारोक्ति ने मत चोरी पर लगाई मुहर: हर्षवर्धन सपकाल

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✍️ डिजिटल न्यूज डेस्क, मुंबई/बुलढाणा | नगरपालिका चुनावों के बीच सत्ताधारी महायुति सरकार पर “वोट खरीदने” का आरोप फिर गरमाया है। बुलढाणा में प्रेस वार्ता के दौरान महाराष्ट्र कांग्रेस अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने एक मंत्री के उस बयान पर कड़ी प्रतिक्रिया दी, जिसमें उन्होंने समर्थकों से कहा था- “किसी से भी पैसे ले लो, लेकिन वोट हमें ही दो।” सपकाल ने इसे लोकतंत्र का “सरासर अपमान” बताते हुए कहा कि भाजपा–महा-युति अब “पैसा फेंक तमाशा देख” की राजनीति पर उतर आई है।

सपकाल ने आरोप लगाया कि मंत्री की यह स्वीकारोक्ति वास्तव में कांग्रेस और राहुल गांधी द्वारा बार-बार उठाए गए “मत चोरी” के मुद्दे पर आधिकारिक मुहर है। उन्होंने कहा कि स्थानीय निकाय चुनाव कार्यकर्ताओं का चुनाव होता है और कांग्रेस ने उनकी भावना का सम्मान करते हुए कई जगह स्वबल पर, तो कुछ स्थानों पर महाविकास आघाड़ी के साथ समन्वय से उम्मीदवार उतारे हैं। “आघाड़ी में नाराज़गी जैसी कोई बात नहीं,” उन्होंने स्पष्ट किया।

महा-युति की आंतरिक खींचतान पर उन्होंने व्यंग्य करते हुए कहा, “ट्रिपल इंजन सरकार सत्ता छोड़े बिना रह नहीं सकती। भाजपा, शिंदे गुट और अजित पवार की एनसीपी- तीनों किसी भी कीमत पर सत्ता में टिके रहने को मजबूर हैं।”

नासिक के तपोवन क्षेत्र में कुंभ मेला तैयारियों के नाम पर 1800 पेड़ों की कटाई पर भी सपकाल ने सरकार पर बड़ा हमला बोला। उन्होंने कहा कि “साधु तो प्रकृति में रहते हैं; ‘साधुग्राम’ के नाम पर की जा रही कटाई सिर्फ पैसे हड़पने का जरिया है।”

मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस द्वारा “पहचान न होने” वाले बयान पर सपकाल ने तंज करते हुए कहा, “मैं न भ्रष्टाचार में शामिल हूँ, न पार्टी बदली है; शायद इसी वजह से वे पहचान नहीं पाए। हाँ, पर जनता से किए वादे वे याद रखें- इसीलिए उन्हें ‘गजनी’ कहा।”


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