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ईमेल आईडी नहीं बना पाए मंत्री, लेकिन 70 लाख के यूरोपीय दौरे को हरी झंडी

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बार्सिलोना में ‘डिजिटल इंडिया’ का प्रतिनिधित्व करेंगे मंत्री शेलार, विपक्ष ने बताया ‘सरकारी सैर-सपाटा’

✍🏻 प्रहरी संवाददाता, मुंबई। महाराष्ट्र में महायुति सरकार के गठन को छह महीने बीत चुके हैं, लेकिन राज्य के सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री आशीष शेलार अब तक अपने विभाग के लिए एक साधारण सरकारी ईमेल आईडी भी सक्रिय नहीं करवा पाए हैं। इस तकनीकी सुस्ती के बावजूद मंत्री महोदय अब स्पेन के बार्सिलोना शहर में होने वाले दो अंतरराष्ट्रीय सम्मेलनों में भाग लेने जा रहे हैं, वह भी केवल 70 लाख रुपये के सरकारी खर्च पर। यह खर्च तीन लोगों के शिष्टमंडल पर किया जा रहा है। यह जानकारी सामान्य प्रशासन विभाग से मिली है।

आश्चर्यजनक यह है कि जिन सम्मेलनों  IOT सॉल्यूशंस वर्ल्ड कांग्रेस 2025 और साइबर सिक्योरिटी कांग्रेस में भाग लेने के लिए यह दौरा हो रहा है, उन्हें तकनीकी उत्पादों के कॉर्पोरेट प्रमोशन का मंच माना जाता है, न कि किसी नीति-निर्माण का। ऐसे में विपक्ष और आम जनता पूछ रहे हैं कि क्या यह दौरा वास्तव में राज्य की डिजिटल प्रगति के लिए है या फिर यह एक ‘सरकारी सैर-सपाटा’ मात्र है?

सरकारी खजाने से खर्च की पूरी डिटेल:

मंत्री आशीष शेलार
👉₹24.08 लाख
प्रमुख सचिव पराग जैन 👉 ₹15.68 लाख
वरिष्ठ सलाहकार सागर शिर्के 👉 ₹8.92 लाख
राज्य का प्रदर्शनी स्टॉल 👉 ₹10.31 लाख
विविध खर्च 👉 ₹10.99 लाख
कुल स्वीकृत राशि👉 ₹70 लाख

11 लाख रुपए की हवाई यात्रा

इनमें केवल हवाई यात्रा का खर्च ही 11.5 लाख रुपए है। मंत्री शेलार को फर्स्ट क्लास (₹8.71 लाख), पराग जैन को बिजनेस क्लास (₹2.02 लाख), और शिरके को इकोनॉमी क्लास (₹79,000) से यात्रा की स्वीकृति दी गई है।

सवाल उठाती है बाकी राशि

मंत्री महोदय का यह दौरा 11 मई से 18 मई तक होगा। लोगों का कहना है कि बार्सिलोना के Le Meridien जैसे आलीशान होटल में ठहरने पर सात दिन में लग्ज़री खर्च भी 8 लाख रुपए से ज्यादा नहीं होता। तो बाकी रकम ‘टेक्नोलॉजी’ की आड़ में किस जेब में जा रही है, यह सवाल अब तेज़ हो गया है।

विपक्ष का सरकार पर निशाना

सरकारी प्रवक्ता इसे वैश्विक मंच पर ‘राज्य की उपस्थिति’ बता रहे हैं, लेकिन आलोचक इसे ‘फॉरेन जंकेट इन द नेम ऑफ टेक्नोलॉजी’ करार दे रहे हैं। विपक्ष ने भी इस दौरे को “सरकारी पैसे पर डिजिटल टूरिज़्म” करार देते हुए कहा,  “एक मंत्री जो छह महीने में ईमेल आईडी न बनवा सके, वह अब यूरोप जाकर महाराष्ट्र का डिजिटल चेहरा बनेंगे। यह विडंबना नहीं तो और क्या है?”

जनता पूछ रही सवाल

मेक इन इंडिया और डिजिटल इंडिया जैसे अभियानों के होते हुए भी राज्य के मंत्री को तकनीकी ज्ञान और प्राथमिक कार्यों में इतनी देरी, और फिर करोड़ों की विदेश यात्रा, यह आम नागरिकों में असंतोष का कारण बन रहा है। जनता पूछ रही है क्या यह वास्तव में राज्य के डिजिटल भविष्य को संवारने की यात्रा है या फिर तकनीक के नाम पर जनता के पैसों से एक आलीशान विदेश भ्रमण?


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