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शिवसेना के कंधे पर सवार होकर BJP की भारी उड़ान

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34 साल में ही बदल गया शिवसेना-बीजेपी का सीट शेयरिंग फॉर्मूला

प्रहरी संवाददाता, मुंबई। महाराष्ट्र की सियासी तस्वीर तीन दशक में काफी बदल चुकी है और इस बार गठबंधन का स्वरूप भी बदल गया है। राज्य में 34 साल पहले शिवसेना बड़े भाई की भूमिका में थी, तो वहीं इस बार बीजेपी के साथ गठबंधन में शिवसेना जूनियर पार्टनर की हैसियत से चुनावी मैदान में उतरी है। इन तीस दशकों में बीजेपी ने बड़े भाई शिवसेना में बंटवारा भी करा दिया। राज्य की 288 विधानसभा सीटों में से बीजेपी लगभग 160 सीटों पर चुनाव लड़ रही है। घोषित तौर पर बीजेपी के खाते में 148 सीटें हैं, जबकि उसके सिंबल पर सहयोगी पार्टी के उम्मीदवार चुनाव लड़ रहे हैं। शिंदे की शिवसेना केवल 80 सीटों पर किस्मत आजमा रही है।

महाराष्ट्र में बीजेपी बढ़ती गई, घटती गई शिवसेना

महाराष्ट्र की सियासत में बीजेपी-शिवसेना पिछले तीन दशक से एक साथ चुनावी किस्मत आजमा रहे हैं। इन तीन दशक में गठबंधन में बीजेपी लगातार बढ़ती रही, जबकि शिवसेना पिछड़ती गई। पिछले चुनाव में भी बीजेपी ने 164 सीटों पर चुनाव लड़ा था, जबकि अविभाजित शिवसेना के हिस्से में 124 सीटें आई थीं। 34 साल पहले जब दोनों पार्टियों के बीच गठबंधन की नींव पड़ी थी, तो शिवसेना ने 183 और बीजेपी ने 104 सीटों पर चुनाव लड़ा था। इस साल के चुनाव में बीजेपी अप्रत्यक्ष तौर पर 164 सीटों पर किस्मत आजमा रही है। बीजेपी ने बैकडोर से अपने 16 नेताओं को शिंदे की शिवसेना और अजित पवार की एनसीपी से टिकट दिया है।

बता दें कि महाराष्ट्र की राजनीतिक में मराठा अस्मिता और उग्र हिंदुत्व को लेकर बालासाहब ठाकरे ने शिवसेना का गठन 1966 में किया था, जबकि बीजेपी का गठन 1980 में हुआ था। 1984 के लोकसभा चुनाव में पहली बार दोनों पार्टियां साथ आईं। हालांकि शिवसेना ने यह चुनाव बीजेपी के चुनाव चिन्ह पर लड़ा था, क्योंकि उस समय उसके पास अपना चुनाव निशान नहीं था।

बीजेपी-शिवसेना ने राज्य में 1990 के विधानसभा चुनाव में पहली बार गठबंधन किया। उस समय शिवसेना ने 183 सीटों पर और बीजेपी ने 104 सीटों पर चुनाव लड़ा था। बीजेपी ने 42 और शिवसेना ने 52 सीटों पर जीत हासिल की थी। इसके बाद 1995 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी 105 और शिवसेना 183 सीट पर चुनाव लड़ी। इसमें शिवसेना को 73 और बीजेपी को 65 सीटें मिलीं। इस तरह पहली बार महाराष्ट्र में इनकी सरकार बनी और मुख्यमंत्री की कुर्सी शिवसेना को मिली।

एनडीए में सीट शेयरिंग फॉर्मूले के तहत 1999 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी 117 सीट और शिवसेना ने 161 सीटों पर चुनाव लड़ा। इस बार बीजेपी ने 56 और शिवेसना ने 69 सीट पर जीत दर्ज की। साल 2004 के विधानसभा चुनाव में शिवसेना 163 और बीजेपी ने 111 सीटों पर चुनाव लड़ा, जिसमें शिवसेना को 62 और बीजेपी को 54 सीटें मिलीं।

बीजेपी ने बदली रणनीति

सीट शेयरिंग फॉर्मूल के तहत साल 2009 के विधानसभा चुनाव में शिवसेना 169 और बीजेपी 119 सीटों पर चुनाव लड़ी। तब बीजेपी ने 46 सीटें औैर शिवसेना 44 सीटें जीतने में कामयाब रही थी। कम सीटों पर लड़कर ज्यादा सीटें जीतने से बीजेपी का आत्मविश्वास बढ़ गया था। इसी का नतीजा था कि 2014 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने शिवसेना की शर्तों पर समझौता नहीं किया। दोनों पार्टियों ने अलग-अलग चुनाव लड़ा।

पिछले चुनाव का इतिहास

2014 में बीजेपी ने 260 सीटों पर चुनाव लड़ा और 122 सीटें जीतीं, जबकि अविभाजित शिवसेना ने 282 सीटों पर चुनाव लड़ा, लेकिन उसे 63 सीटों पर ही जीत मिली। हालांकि बीजेपी के पास बहुमत नहीं था, उसने शिवसेना को फिर से साथ में ले लिया। साल 2019 में बीजेपी ने 164 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे थे, जबकि अविभाजित शिवसेना ने 124 सीट पर चुनाव लड़ा था। तब बीजेपी को 105, शिवसेना को 56, एनसीपी को 54 और कांग्रेस को 44 सीटें मिली थीं।

 

2024 में महायुति सीट फॉर्मूला

बीजेपी         148
शिवसेना      80
एनसीपी      53
एमएनएस    01
मित्रपक्ष      06

(बीजेपी के सिंबल पर)


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