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केजरीवाल क सशर्त जमानत, फिर भी सीएमओ और सचिवालय नहीं जा सकेंगे

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डिजिटल न्यूज डेस्क, नई दिल्ली। आम आदमी पार्टी (आप) के संयोजक अरविंद केजरीवाल को बेशक कथित आबकारी घोटाले में जमानत मिल गई है, लेकिन ‘मुख्यमंत्री’ केजरीवाल अब भी जेल में ही रहेंगे। सुप्रीम कोर्ट की बंदिशों की वजह से केजरीवाल फिलहाल मुख्यमंत्री से संबंधित काम नहीं कर सकेंगे। कैबिनेट विस्तार समेत बैठकों के बारे में सुप्रीम कोर्ट से स्पष्टीकरण लेना पड़ेगा।

दरअसल, सुप्रीम कोर्ट ने अरविंद केजरीवाल को सशर्त जमानत दी है। जेल से बाहर आने के बाद केजरीवाल मुख्यमंत्री कार्यालय व दिल्ली सचिवालय नहीं जा सकेंगे। वहीं, किसी भी सरकारी फाइल पर तब तक दस्तखत नहीं करेंगे, जब तक ऐसा करना जरूरी न हो। वे केवल उन्हीं फाइलों पर हस्ताक्षर कर सकेंगे, जिनको उपराज्यपाल के पास भेजा जाना है। कैबिनेट बैठक, उसके विस्तार और दूसरे कामों को करने की इजाजत नहीं होगी।

केजरीवाल पर लगाई गई शर्तें

  •  केजरीवाल न तो मुख्यमंत्री कार्यालय और न ही सचिवालय जा सकेंगे।
  •  किसी भी सरकारी फाइल पर तब तक दस्तखत नहीं करेंगे, जब तक कि एलजी की ऐसा करना जरूरी न लगे।
  •  अपने ट्रायल को लेकर कोई सार्वजनिक बयान या टिप्पणी नहीं करेंगे।
  •  किसी भी गवाह से किसी तरह की बातचीत नहीं करेंगे।
  •  इस केस से जुड़ी किसी भी आधिकारिक फाइल तक पहुंच नहीं रखेंगे।

 जरूरत पड़ने पर ट्रायल कोर्ट में पेश होंगे और जांच में सहयोग करेंगे।

156 दिन तक काट चुके हैं जेल की सजा

केजरीवाल को सिविल लाइंस स्थित उनके आवास से 21 मार्च को ईडी ने गिरफ्तार किया था। 10 दिन की पूछताछ के बाद एक अप्रैल को उन्हें तिहाड़ जेल भेज दिया गया। 26 जून को सीबीआई ने इसी मामले में पूछताछ के लिए उन्हें फिर गिरफ्तार कर लिया। लोक सभा चुनाव को देखते हुए करीब 51 दिन बाद 10 मई को सुप्रीम कोर्ट ने 21 दिन के लिए अंतरिम बेल दी। दो जून को केजरीवाल ने सरेंडर कर दिया।

 

कथित शराब घोटाले के चार बड़े नेता हैं जमानत पर

अरविंद केजरीवालः कथित शराब घोटाले में मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को 21 मार्च को ईडी ने गिरफ्तार किया था। इसके बाद उन्हें सीबीआई ने भी गिरफ्तार कर लिया था। जांच एजेंसी ने सुप्रीम कोर्ट में केजरीवाल को शराब घोटाले का सरगना बताया था। उनको शुक्रवार जमानत मिली है।

मनीष सिसोदियाः 26 फरवरी 2023 को गिरफ्तार सिसोदिया भी जमानत पर बाहर हैं। वह नौ अगस्त को जेल से बाहर आए। दिल्ली में जब नई शराब नीति लागू हुई थी, तब आबकारी विभाग सिसोदिया के पास ही था। सिसोदिया पर आरोप है कि आबकारी मंत्री रहते हुए उन्होंने मनमाने और एकतरफा फैसले लिए।

संजय सिंहः आम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह को ईडी ने पिछले साल 4 अक्टूबर को गिरफ्तार किया था। संजय सिंह पर आरोपियों से 2 करोड़ की रिश्वत लेने का आरोप था। सुप्रीम कोर्ट से इस साल 2 अप्रैल को उन्हें जमानत मिल गई थी।

के. कविताः बीआरएस नेता के. कविता को 15 मार्च को गिरफ्तार किया गया था। ईडी का दावा है कि आम आदमी पार्टी के नेताओं के लिए विजय नायर और दूसरे लोगों को 'साउथ ग्रुप' ने 100 करोड़ रुपये की रिश्वत दी थी। के. कविता भी इस साउथ ग्रुप का हिस्सा थीं। सुप्रीम कोर्ट ने 27 अगस्त को उन्हें जमानत दे दी थी।

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