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सूदखोरी के जाल में फंसा था किसान, कर्ज चुकाने को बेची किडनी
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किडनी बेचने के बाद भी कर्ज का पहाड़ खड़ा
✍🏻 डिजिटल न्यूज़ डेस्क, मुंबई/चंद्रपुर | महाराष्ट्र में किसानों की बदहाल हालत का एक भयावह चेहरा पिछले साल सामने आया है। चंद्रपुर जिले के एक किसान को साहूकार का कर्ज चुकाने के लिए अपनी किडनी बेचने तक मजबूर होना पड़ा। विधानसभा में यह मामला उठाते हुए कांग्रेस विधायक दल के नेता विजय वडेट्टीवार ने आरोप लगाया कि राज्य में सूदखोरी का संगठित नेटवर्क सक्रिय है और इस प्रकरण में शामिल आरोपियों पर मकोका के तहत कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए।
वडेट्टीवार ने ध्यानाकर्षण प्रस्ताव के जरिए बताया कि रोशन कुडे नामक किसान ने एक लाख रुपये का कर्ज लिया था, लेकिन साहूकार ने उससे 74 लाख रुपये तक वसूल कर लिए। ट्रैक्टर और खेती गिरवी रखने के बावजूद कर्ज खत्म नहीं हुआ और अंततः किसान को विदेश में डेटा सेंटर में नौकरी का झांसा देकर भेजा गया, जहां उसकी किडनी निकाली गई। वडेट्टीवार ने दावा किया कि उनकी पहल पर पीड़ित किसान को वापस भारत लाया गया।
उन्होंने आरोप लगाया कि इस अवैध किडनी रैकेट की जड़ें दिल्ली और दक्षिण भारत तक फैली हैं और इसमें एक पद्मश्री सम्मानित डॉक्टर की संलिप्तता भी सामने आ रही है। उन्होंने सरकार से सवाल किया कि क्या वह ऐसे प्रभावशाली लोगों पर कार्रवाई करने का साहस दिखाएगी।
मामले की गंभीरता को देखते हुए वडेट्टीवार ने रैकेट के मुख्य सरगनाओं और शामिल साहूकारों पर महाराष्ट्र संगठित अपराध नियंत्रण अधिनियम (मकोका) के तहत कार्रवाई की मांग की। साथ ही, पीड़ित किसान के परिवार को मुख्यमंत्री सहायता निधि से 10 लाख रुपये की तत्काल आर्थिक मदद देने की मांग भी की। जवाब में गृह राज्यमंत्री ने आश्वासन दिया कि आरोपियों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी और पीड़ित परिवार को सरकार हर संभव सहायता प्रदान करेगी।
