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प्रभावित होगी आर्थिक सुधार की गति, बढ़ेगा राजकोषीय घाटा

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राजकोषीय घाटा जीडीपी का 8.3 प्रतिशत रहेगा
मुंबई। भारत चालू वित्त वर्ष के दौरान अनुमानित राजकोषीय घाटे के लक्ष्य को हासिल करने से चूक सकता है। इसकी वजह मुख्य तौर पर राजस्व प्राप्ति में कमी होगी। फिच सोल्यूशंस ने शुक्रवार को यह कहा। सरकार का राजकोषीय घाटा 2021- 22 की समाप्ति पर जीडीपी का 8.3 प्रतिशत रहेगा, जबकि सरकार ने चालू वित्त वर्ष के दौरान (अप्रैल 2021 से लेकर मार्च 2022) की अवधि में राजकोषीय घाटा उसके सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के मुकाबले 6.8 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया है। फिच सोल्यूशंस ने इससे पहले आठ प्रतिशत के राजकोषीय घाटे का अनुमान लगाया था। सरकार की कुल प्राप्तियों और कुल व्यय के अंतर को राजकोषीय घाटा अथवा वित्तीय घाटा कहते हैं। भारत में कोरोना वायरस के बढ़ते मामले और उसको लेकर लगाये गये लॉकडाउन उपायों के चलते भारत की आर्थिक सुधार की गति प्रभावित होगी। इसका राजकोषीय राजस्व की प्राप्ति पर नकारात्मक असर होगा। वित्त वर्ष के दौरान सरकार का खर्च 34.8 लाख करोड़ रुपये के अनुमानित स्तर के आसपास रहने की उम्मीद है। इसके विपरीत सरकार की राजस्व प्राप्ति उसके बजट अनुमान 17.8 लाख करोड़ रुपये से कम रहकर 16.5 लाख करोड़ रुपये रह जाने का अनुमान है। वित्त वर्ष 2021-22 के बजट में सरकार की मुख्य तौर पर परिवहन, शहरी विकास और बिजली के अलावा स्वास्थ्य सेवाओं, कृषि और ग्रामीण विकास के क्षेत्र में व्यय किये जाने की योजना है।


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