Samachar Prahari
OtherTop 10ताज़ा खबरबिज़नेसभारतराज्य

राजकोषीय घाटा बढ़कर 13 प्रतिशत होने का अनुमान

Share

देश आर्थिक संकट की ओर जा रहा है, राजस्व संग्रह भी असंतोषजनक

मुंबई। केंद्र सरकार का राजकोषीय घाटा चालू वित्त वर्ष में उसके तय अनुमान से कहीं आगे निकल सकता है। केंद्र का कुल राजकोषीय घाटा सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के 13 फीसदी को छू सकता है। एसबीआई रिसर्च की रिपोर्ट के अनुसार, इस साल बाजार मूल्य पर आधारित जीडीपी के वित्त वर्ष 2018-19 के स्तर से नीचे रहने के अनुमान है। वर्ष 2016 से मार्च 2020 के बीच लिए गए केंद्र सरकार के गलत आर्थिक निर्णय इस आर्थिक संकट के जिम्मेदार हैं।

आर्थिक संकट की ओर देश

कोरोना वायरस से पैदा कर दिए गए हालातों ने देश को गहरे आर्थिक संकट में डाल दिया है। देश के सभी कोर सेक्टर के ठप हो जाने, बेरोजगारी व मंहगाई के बढ़ते संकट से अब मोदी सरकार के हाथ पाँव फूल रहे हैं। केंद्र सरकार ने अनुमान लगाया था कि राजकोषीय घाटा 3.8 प्रतिशत रहेगा, लेकिन सरकार के अनुमान की तुलना में राजकोषीय घाटा 7.9 प्रतिशत पर पहुंच सकता है। राजकोषीय घाटा बढ़कर 13 प्रतिशत तक पहुंच सकता है, जो सरकार के लिए चिंता की बात है। इसके साथ ही, सार्वजनिक कंपनियों के विनिवेश लक्ष्य को भी इस साल हासिल नहीं कर पाएगी।

राजस्व संग्रह कम

स्थिति कितनी जटिल है इसका अनुमान इसी से लगाया जा सकता है कि इस वित्तवर्ष के पहले पाँच महीनो में ही सरकारी खर्च 8.7 लाख करोड़ रुपये यानी बजट अनुमान के 109.3 प्रतिशत पर पहुंच गया है। कोविड 19 संकट की वजह से राजस्व संग्रह की स्थिति भी संतोषजनक नहीं है। हालांकि मई में राजस्व संग्रह के लक्ष्य को बढ़ा कर 12 लाख करोड़ रुपये का अनुमान कर दिया गया है।

व्यय और राजस्व के बीच का अंतर बढा

भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) की ओर से जारी आंकड़ों के अनुसार, राजकोषीय घाटा (व्यय और राजस्व के बीच का अंतर) अप्रैल से अगस्त के दौरान 8,70,347 करोड़ रुपये यानी बजट में अनुमानित वार्षिक लक्ष्य के 109.3 फीसदी पर पहुंच गया। वित्तीय वर्ष 2019- 20 में सरकार का राजकोषीय घाटा सात साल के उच्च स्तर 4.6 प्रतिशत पर पहुंच गया था। लेकिन इस साल तो यह 13 प्रतिशत हो जाने की बात की जा रही है।

राज्य सरकारों की स्थिति खराब

राज्यों की स्थिति भी बहुत खराब है। भारत के 18 सबसे बड़े राज्यों में राजकोषीय घाटा, कुल व्यय और प्राप्तियों के बीच का अंतर पहली तिमाही में बजट अनुमानों का 40.7 प्रतिशत रहा, जो कि एक साल पहले तिमाही में 13.4 प्रतिशत था। केंद्र सरकार की ओर से राज्यों को जीएसटी रिटर्न का भुगतान तक नहीं हो पाया है।

विनिवेश के लक्ष्य से काफी पीछे

सरकार ने विनिवेश का जो लक्ष्य निर्धारित किया था, वह भी पूरा नहीं हो पाएगा। एअर इंडिया और बीपीसीएल के विनिवेश की प्रक्रिया भी लगातार टल रही है। सरकार ने इस वित्त वर्ष में विनिवेश से 2.1 लाख करोड़ रुपये जुटाने का का बड़ा लक्ष्य रखा था, लेकिन अब इसके पूरे होने की उम्मीद बिल्कुल नहीं है। सरकार को इस साल अपने लक्ष्य से डेढ़ गुना ज्यादा करीब 12 लाख करोड़ रुपये का उधार लेना पड़ सकता है। सरकार निवेशकों का विश्वास भी हासिल नहीं कर पा रही है।

 


Share

Related posts

वैक्सीन की दोनों खुराक लेनेवालों को मिलेगी लोकल ट्रेन में यात्रा की अनुमति!

Prem Chand

एचडीआईएल समूह के 233 करोड़ रुपये के शेयर कुर्क

Prem Chand

दिग्गज क्रिकेटरों के ‘लेडीज वर्जन’, डेट पर जाओगे

samacharprahari

Leave a Comment