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महायुति में ‘महा-विस्फोट’: नामांकन से 150 मिनट पहले पिंपरी में दोस्ती का अंत!

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  • शिवसेना (शिंदे) को भाजपा का दो टूक जवाब

  • ‘अब जगह नहीं’; RPI के साथ नई ‘कमल’ वाली केमिस्ट्री

प्रहरी संवाददाता, पिंपरी | विशेष संवाददाता पिंपरी-चिंचवड की राजनीति में मंगलवार को वह हुआ जिसकी पटकथा पिछले कई दिनों से बंद कमरों में लिखी जा रही थी। जिसे ‘अटूट’ गठबंधन बताया जा रहा था, वह नामांकन की अंतिम समय सीमा से महज ढाई घंटे पहले ताश के पत्तों की तरह ढह गया। भाजपा ने झुकने के बजाय शिवसेना (शिंदे गुट) को उसकी जमीनी हकीकत का आईना दिखाते हुए अकेले चलने का फैसला किया है।

29 से 10 पर आई शिवसेना, फिर भी नहीं पिघली भाजपा

गठबंधन टूटने के पीछे सीटों का गणित और भाजपा का कड़ा रुख सबसे बड़ा कारण रहा। सूत्रों के अनुसार, शिवसेना ने पहले 29 सीटों की मांग रखी थी। बात न बनने पर आंकड़ा 16, फिर 13 और अंत में 10 सीटों तक गिर गया। लेकिन भाजपा ने स्पष्ट कर दिया कि उनके उम्मीदवार मैदान में उतर चुके हैं और अब वापसी का कोई रास्ता नहीं है।
बताया जा रहा है कि वार्ड क्रमांक 23 और 24 ही वह ‘फ्लैशपॉइंट’ रहे जहां दोनों दलों की जिद ने समझौते की गुंजाइश खत्म कर दी। इन दो वार्डों के विवाद ने पूरी बातचीत की मेज ही पलट दी।

भाजपा का नया दांव: शिवसेना बाहर, अठावले अंदर!

शिवसेना से पल्ला झाड़ते ही भाजपा ने ‘प्लान-बी’ सक्रिय किया। भाजपा ने तत्काल रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया (अठावले गुट) को साथ लिया और उन्हें 5 सीटें थमा दीं। खास बात यह रही कि ये उम्मीदवार भाजपा के ‘कमल’ निशान पर चुनाव लड़ेंगे, जिससे भाजपा ने अपना वोट बैंक भी सुरक्षित रखा और गठबंधन का धर्म भी निभाया।

ऊपर दोस्ती, नीचे कुश्ती: सांसद बारणे की सफाई

इस सियासी उठापटक के बाद सांसद श्रीरंग बारणे ने मोर्चा संभाला। उन्होंने कहा, ‘गठबंधन पुराना था, दुख है कि टूट गया। स्थानीय कार्यकर्ताओं की नाराजगी को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता था।’ हालांकि, उन्होंने डैमेज कंट्रोल करते हुए यह भी जोड़ा कि इस फूट का असर राज्य या केंद्र की महायुति पर नहीं पड़ेगा।

प्रतिष्ठा की जंग

नामांकन के आखिरी पलों में हुई यह भागदौड़ शिवसेना के लिए किसी झटके से कम नहीं है। अब पिंपरी-चिंचवड का मैदान विकास के मुद्दों से हटकर ‘प्रतिष्ठा और वजूद’ की लड़ाई में तब्दील हो चुका है।

भाजपा ने अपनी ताकत दिखाकर यह संदेश दे दिया है कि शहर में ‘बड़ा भाई’ कौन है। अब देखना यह है कि जनता इस ‘Remind’ कराई गई हैसियत को बैलेट बॉक्स में किस तरह दर्ज करती है।


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