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विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) ने भारतीय बाजार से अपना हाथ खींचना शुरू कर दिया
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पिछले तीन सत्रों में करीब 14,478 करोड़ रुपये की भारी बिकवाली
✍️ प्रहरी संवाददाता मुंबई | अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच गहराते युद्ध के संकट ने भारतीय शेयर बाजार की कमर तोड़ दी है। केवल दो कारोबारी दिनों के भीतर भारतीय निवेशकों की करीब 16.32 लाख करोड़ रुपये की संपत्ति डूब गई है। मार्च के शुरुआती हफ्ते में ही दलाल स्ट्रीट पर ‘ब्लडबाथ’ जैसी स्थिति देखी गई, जिससे बीएसई (BSE) पर सूचीबद्ध कंपनियों का कुल मार्केट कैप गिरकर 447.18 लाख करोड़ रुपये पर आ गया है।
बुधवार, 4 मार्च को बाजार खुलते ही चौतरफा बिकवाली देखने को मिली। सेंसेक्स (Sensex) कारोबार के दौरान 1,795 अंकों तक गोता लगाकर 78,443 के निचले स्तर पर पहुंच गया, जबकि अंत में यह 1,122 अंकों की भारी गिरावट के साथ 79,116 पर बंद हुआ। वहीं, निफ्टी (Nifty) भी 385 अंकों की कमजोरी के साथ 24,480 के स्तर पर सिमट गया।
गौरतलब है कि होली के अवकाश के बाद जब निवेशक लौटे, तो युद्ध की खबरों ने बाजार के सेंटीमेंट को पूरी तरह बिगाड़ दिया। इस महा-गिरावट के पीछे सबसे बड़ा कारण कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों में आया उछाल है।
ईरान और अमेरिका के बीच सैन्य टकराव के चलते ब्रेंट क्रूड 82 डॉलर प्रति बैरल के पार निकल गया है। भारत अपनी तेल जरूरतों का एक बड़ा हिस्सा आयात करता है, ऐसे में तेल महंगा होने से देश में महंगाई बढ़ने और व्यापार घाटा गहराने का डर पैदा हो गया है।
इसी डर के कारण विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) ने भारतीय बाजार से अपना हाथ खींचना शुरू कर दिया है और पिछले तीन सत्रों में उन्होंने करीब 14,478 करोड़ रुपये की भारी बिकवाली की है।
बाजार की इस गिरावट में सबसे ज्यादा मार मेटल, बैंकिंग और रियलिटी सेक्टर्स को पड़ी है। निफ्टी मेटल इंडेक्स में 4 प्रतिशत तक की गिरावट दर्ज की गई, जबकि टाटा स्टील जैसे दिग्गज शेयर 6 प्रतिशत तक टूट गए। युद्ध के कारण एविएशन सेक्टर भी बुरी तरह प्रभावित हुआ है, क्योंकि ईंधन महंगा होने और मिडिल ईस्ट का हवाई मार्ग बाधित होने से इंडिगो और स्पाइसजेट जैसी कंपनियों के शेयरों में 7-8 प्रतिशत की गिरावट आई।
रुपया भी ऐतिहासिक निचले स्तर पर पहुंचा
युद्ध की आशंकाओं के बीच भारतीय रुपया भी अपने ऐतिहासिक निचले स्तर (92.17 प्रति डॉलर) पर जा गिरा है। निवेशकों के लिए फिलहाल सबसे सुरक्षित ठिकाना सोना और चांदी बन गए हैं, जहां भारी खरीदारी के कारण इनकी कीमतें भी तेजी से बढ़ रही हैं। बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि यदि यह संघर्ष लंबा खिंचता है और होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से होने वाली वैश्विक तेल सप्लाई प्रभावित होती है, तो भारतीय बाजार में अभी और बड़ी गिरावट देखने को मिल सकती है।
