✍️ डिजिटल न्यूज डेस्क, मुंबई | भारतीय रिजर्व बैंक के आधिकारिक फॉरेक्स आंकड़ों और अंतरराष्ट्रीय विनिमय बाजार के 12 वर्षों के रिकॉर्ड बताते हैं कि वर्ष 2014 से 2026 के बीच वैश्विक पटल पर भारतीय रुपये की विनिमय दर में दोतरफा रुझान दर्ज किया गया है। जहां एक ओर अमेरिकी डॉलर, यूरो और ब्रिटिश पाउंड जैसी पारंपरिक वैश्विक आरक्षित मुद्राओं के मुकाबले रुपये में लगातार संरचनात्मक गिरावट आई है, वहीं दूसरी ओर जापानी येन और कुछ विकासशील अर्थव्यवस्थाओं की मुद्राओं के सामने भारतीय मुद्रा ने उल्लेखनीय मजबूती हासिल की है।
मई 2014 में अमेरिकी डॉलर के मुकाबले करीब 58 से 60 के स्तर पर कारोबार करने वाला रुपया सितंबर 2026 में 96 से 97 प्रति डॉलर के दायरे में टिक गया है, जो इस बारह साल की अवधि में डॉलर के मुकाबले भारतीय मुद्रा में आई लगभग 45 से 50 प्रतिशत की कुल नाममात्र गिरावट को दर्शाता है।
केंद्रीय बैंक के तुलनात्मक विनिमय आंकड़ों के अनुसार, यूरोपीय संघ की मुद्रा यूरो के सामने रुपया 2014 के लगभग 80 से 82 के स्तर से फिसलकर 2026 में 108 से 109 प्रति यूरो के स्तर पर पहुंच गया है, जिसमें करीब 15 से 20 प्रतिशत की गिरावट दर्ज हुई है।
इसी तरह ब्रिटिश पाउंड स्टर्लिंग के मुकाबले भारतीय मुद्रा 2014 में 98 से 101 के आसपास थी, जो 2026 में 106 से 109 प्रति पाउंड के दायरे में आ गई है, यानी पाउंड के सामने रुपये में 7 से 8 प्रतिशत का मूल्यह्रास हुआ है।
वैश्विक स्तर पर सबसे सुरक्षित मानी जाने वाली स्विस मुद्रा स्विस फ्रैंक के सामने भारतीय रुपये को सबसे भारी झटका लगा है, जहां 2014 के 65 से 68 रुपये प्रति फ्रैंक के मुकाबले 2026 में विनिमय दर 116 रुपये तक पहुंच गई, जो रुपये में 50 प्रतिशत से अधिक की भारी गिरावट को दर्शाती है।
द्विपक्षीय व्यापार के लिहाज से अत्यंत संवेदनशील चीनी युआन के मुकाबले रुपया 2014 में 9.50 से 9.80 प्रति युआन था, जो 2026 में कमजोर होकर 13.50 से 14.25 रुपये प्रति युआन के स्तर पर दर्ज किया गया, जिससे युआन के सामने रुपये में लगभग 25 प्रतिशत की कमजोरी आई है।
इस दौरान ऑस्ट्रेलियाई डॉलर और कनाडाई डॉलर जैसी कमोडिटी आधारित मुद्राओं के मुकाबले रुपये का प्रदर्शन काफी हद तक संतुलित रहा है, जहां 2014 के 54 से 56 रुपये के मुकाबले ऑस्ट्रेलियाई डॉलर 2026 में 67 से 69 रुपये के आसपास टिका हुआ है, यानी इसमें 19.12 प्रतिशत का उतार-चढ़ाव देखा गया है। वहीं कनाडाई डॉलर 2014 के 53 से 55 रुपये के स्तर से बढ़कर 2026 में 67 से 69 रुपये पर पहुंचा, जिसमें रुपये का मूल्यह्रास लगभग 19 से 20 प्रतिशत रहा।
