जाली रजिस्ट्रेशन पर नकेल, लेकिन हाईटेक रैकेट बने नई चुनौती
✍️ प्रहरी संवाददाता, मुंबई / नई दिल्ली | देश की माल एवं सेवा कर (जीएसटी) प्रणाली में इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) का लाभ उठाकर सरकारी खजाने को चूना लगाने वाले एक विशाल सिंडिकेट का खुलासा हुआ है। केंद्रीय कर अधिकारियों ने चालू वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान 74,781.56 करोड़ रुपये की रिकॉर्ड जीएसटी धोखाधड़ी पकड़ी है।
संसद में प्रस्तुत आंकड़ों के अनुसार, पिछले दो वर्षों में इस तरह की वित्तीय हेराफेरी के मामलों की संख्या में लगभग सौ प्रतिशत की भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई है। केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने राज्य सभा में एक लिखित उत्तर में बताया कि इस व्यापक कर चोरी के खिलाफ चलाए गए राष्ट्रव्यापी जांच अभियानों के तहत अब तक 358 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है।
मामलों में अप्रत्याशित उछाल और राज्यों का गणित
राजस्व विभाग की विस्तृत रिपोर्ट दर्शाती है कि नकली इनवॉइस के जरिए फर्जी क्रेडिट पास करने का जाल देश भर में तेजी से फैला है। वित्तीय वर्ष 2024-25 में जहां आईटीसी धोखाधड़ी के 15,283 मामले दर्ज किए गए थे, वहीं 2025-26 में यह आंकड़ा बढ़कर 30,162 मामलों तक पहुंच गया।
भौगोलिक स्तर पर आंकड़ों का विश्लेषण करने पर महाराष्ट्र और गुजरात इस फर्जीवाड़े से सबसे ज्यादा प्रभावित राज्यों के रूप में सामने आए हैं। वित्तीय मूल्य के लिहाज से महाराष्ट्र शीर्ष पर रहा, जहां 9,629 मामलों में 18,320 करोड़ रुपये के अवैध आईटीसी क्लेम उजागर हुए। दूसरी ओर, कुल दर्ज मामलों की संख्या के मामले में गुजरात आगे रहा, जहां 12,511 मामलों की जांच में 12,633 करोड़ रुपये का फर्जीवाड़ा पकड़ा गया।
फर्जी पैन और जाली आधार जैसे दस्तावेजों के जरिए बनाए गए बोगस जीएसटी खातों की संख्या वित्त वर्ष 2023-24 के 5,699 मामलों से घटकर 2025-26 में 1,517 रह गई है। हालांकि, इन सीमित मामलों में भी 9,940 करोड़ रुपये का क्रेडिट फ्रॉड शामिल पाया गया।
विशेषज्ञों के अनुसार, शुरुआती स्तर पर कागजी सत्यापन सख्त होने के कारण अब जालसाज फर्जी पंजीकरण कराने के बजाय अधिक परिष्कृत और संगठित हाईटेक नेटवर्क का सहारा ले रहे हैं। ये सिंडिकेट वैध दिखने वाली शेल कंपनियों की जटिल श्रृंखलाएं बनाकर बड़ी राशि के फर्जी इनवॉइस जनरेट कर रहे हैं।
मैन्युफैक्चरिंग से लेकर सर्विस सेक्टर तक फैला दायरा
कर अधिकारियों की पड़ताल में यह बात स्पष्ट हुई है कि आईटीसी फ्रॉड का दायरा सिर्फ कागजी कंपनियों तक सीमित न होकर विभिन्न उत्पादक और सेवा क्षेत्रों में फैला हुआ है। मुख्य रूप से आयरन एंड स्टील, टेक्सटाइल, प्लास्टिक, पेपर प्रोडक्ट्स, सीमेंट और कॉपर जैसे भारी विनिर्माण उद्योगों में जाली बिलिंग के जरिए फर्जी क्रेडिट पास करने के पैटर्न मिले हैं।
इसके साथ ही मैनपावर सप्लाई, वर्क्स कॉन्ट्रैक्ट और रियल एस्टेट सेवाओं जैसे सर्विस सेक्टर में भी फर्जी कागजातों के आधार पर इनपुट टैक्स क्रेडिट हासिल करने वाले नेटवर्क बेनकाब किए गए हैं। केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर और सीमा शुल्क बोर्ड (CBIC) अब डेटा एनालिटिक्स और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की मदद से संदिग्ध लेनदेन की निगरानी कर रहा है ताकि फर्जी क्रेडिट की उत्पत्ति को शुरुआती चरण में ही रोका जा सके।
