ट्रंप के एक बयान से भारतीय शेयर बाजार में हाहाकार
ईरान पर अमेरिकी राष्ट्रपति के कड़े रुख से दुनिया भर के बाजारों में पैनिक सेलिंग
कच्चा तेल 6% उछला, भारत पर गहराया ऊर्जा संकट का खतरा।
✍️ डिजिटल न्यूज डेस्क, मुंबई | अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के एक एलान ने बुधवार को भारत समेत वैश्विक बाजारों में भूचाल ला दिया। ईरान के साथ सीजफायर खत्म करने और डील न करने के ट्रंप के बयान से निवेशकों में ऐसा खौफ पैदा हुआ कि भारतीय शेयर बाजार ताश के पत्तों की तरह ढह गया। दोपहर 1:40 बजे तक सामान्य दिख रहा सेंसेक्स अगले 20 मिनट में करीब 1000 अंक का गोता लगा गया। देखते ही देखते सेंसेक्स इंट्राडे में 1900 अंक से ज्यादा टूट गया और कारोबार के अंत में 1667 अंकों की भारी गिरावट के साथ 76,503.60 पर बंद हुआ। वहीं निफ्टी भी 579 पॉइंट फिसलकर 23,817 पर आ गया। इस चौतरफा तबाही में महज कुछ ही मिनटों के भीतर बीएसई (BSE) पर लिस्टेड कंपनियों का मार्केट कैप 10 लाख करोड़ रुपये घटकर 470 लाख करोड़ रुपये रह गया।
बाजार में आई इस ऐतिहासिक गिरावट के पीछे अमेरिकी राष्ट्रपति का बयान सबसे बड़ा ट्रिगर रहा, जिसने अमेरिका-ईरान युद्ध दोबारा शुरू होने के संकेत दे दिए हैं। इस भू-राजनीतिक तनाव के कारण वैश्विक बाजारों में बिकवाली हावी हो गई।
होर्मुज जलडमरूमध्य में नाकेबंदी और अमेरिकी हमलों के डर से ब्रेंट क्रूड 6 फीसदी से ज्यादा उछलकर 78.09 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया। इसके साथ ही अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में उछाल और डॉलर के मुकाबले रुपये के 95.50 के स्तर से नीचे गिरने जैसे कारकों ने निवेशकों की घबराहट को और बढ़ा दिया।
अब आने वाले दिनों में भारत पर इसका सीधा और गहरा असर देखने को मिल सकता है। भारत अपनी जरूरत का 85 फीसदी कच्चा तेल और करीब 60 फीसदी से ज्यादा एलपीजी आयात करता है, जिसका बड़ा हिस्सा होर्मुज के रास्ते ही देश में आता है।
वर्तमान में भारत के 9 जहाज और 198 नाविक वहां फंसे हुए हैं। अगर अमेरिका और ईरान के बीच तनाव बढ़ने से यह व्यापारिक मार्ग पूरी तरह ठप होता है, तो भारत को भारी ऊर्जा संकट, कच्चे माल की किल्लत और चौतरफा महंगाई का सामना करना पड़ सकता है।