Samachar Prahari
OtherTop 10ताज़ा खबरराज्य

चीफ़ एग्जामिनेशन में हुई कमी को क्रॉस-एग्जामिनेशन में ठीक किया जा सकता है: सुप्रीम कोर्ट

Share

✍🏻 डिजिटल न्यूज़ डेस्क, नई दिल्ली | सुप्रीम कोर्ट ने वसीयत (Will) से जुड़े एक अहम फैसले में स्पष्ट किया है कि चीफ़ एग्जामिनेशन में रह गई कमियों को गवाह के क्रॉस-एग्जामिनेशन के दौरान पूरा किया जा सकता है। अदालत ने कहा कि केवल इस आधार पर वसीयत को अप्रमाणिक नहीं ठहराया जा सकता कि चीफ़ एग्जामिनेशन में सभी तथ्यों का स्पष्ट उल्लेख नहीं हुआ हो।

जस्टिस एहसानुद्दीन अमनुल्लाह और जस्टिस के. विनोद चंद्रन की पीठ के समक्ष केरल से जुड़ा यह मामला आया था, जिसमें वसीयतकर्ता की एक बेटी ने वसीयत की वैधता को चुनौती दी थी। बेटी का तर्क था कि उसे वसीयत में शामिल नहीं किया गया और वसीयत के अटेस्टेशन में कानूनी कमी है। उसका कहना था कि जीवित अटेस्टिंग गवाह (DW-2) ने अपने चीफ़ एग्जामिनेशन में यह स्पष्ट नहीं किया कि क्या उसने दूसरे अटेस्टिंग गवाह को वसीयत पर हस्ताक्षर करते देखा था।

इस तर्क को मानते हुए ट्रायल कोर्ट और केरल हाईकोर्ट ने वसीयत को सही ढंग से सिद्ध न मानते हुए प्रतिवादी-बेटी के पक्ष में फैसला दिया था। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने इन फैसलों को पलट दिया।

जस्टिस के. विनोद चंद्रन द्वारा लिखे गए निर्णय में कहा गया कि भले ही DW-2 ने चीफ़ एग्जामिनेशन में दूसरे गवाह के हस्ताक्षर का स्पष्ट उल्लेख नहीं किया, लेकिन यह कमी क्रॉस-एग्जामिनेशन में पूरी हो गई। अदालत ने माना कि क्रॉस-एग्जामिनेशन में पूछे गए लीडिंग सवाल के जवाब में DW-2 ने पुष्टि की कि वसीयतकर्ता और दोनों अटेस्टिंग गवाहों ने उसी तारीख को वसीयत पर हस्ताक्षर किए थे।

कोर्ट ने स्पष्ट किया कि क्रॉस-एग्जामिनेशन में दिए गए जवाब को कमतर सबूत नहीं कहा जा सकता। इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने अपील स्वीकार करते हुए वसीयत को वैध रूप से सिद्ध माना और वादी-बेटी को उत्तराधिकार से बाहर कर दिया।

 


Share

Related posts

फर्जी टीकाकरण घोटाले में एफआईआर दर्ज

samacharprahari

पुणे में मोटरसाइकिल डीलर लापता

Prem Chand

दिवाली पर ₹6.05 लाख करोड़ का रिकॉर्ड कारोबार

samacharprahari

Leave a Comment