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“आकाश में मौत से मुलाकात, फिर ज़िंदगी की जीत”

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सोलो सर्वाइवल की अनोखी कहानियां, समाचार प्रहरी के जरिए

✍🏻 प्रहरी संवाददाता, मुंबई।  13 जून 2025 को अहमदाबाद में हुए भयावह एयर इंडिया प्लेन क्रैश ने पूरी दुनिया को हिलाकर रख दिया, लेकिन इस त्रासदी में एक चमत्कार हुआ—रमेश विश्वास, एकमात्र जीवित बचे व्यक्ति। उनकी कहानी न केवल रोमांचकारी है, बल्कि मानव की जिजीविषा का प्रतीक भी।
रमेश ने बताया, “लग रहा था, सब खत्म हो गया। मेरी आँखों के सामने आग और धुआँ था, लेकिन जब होश आया, मैं जिंदा था। विश्वास ही नहीं हो रहा था।” उनका जीवित बचना किसी चमत्कार से कम नहीं।

ऐसी ही एक और कहानी है 1972 के एंडीज हादसे की, जहाँ उरुग्वे की फ्लाइट 571 पहाड़ों से टकरा गई। 45 यात्रियों में से 16 लोग महीनों तक बर्फीले जंगल में जीवित रहे। उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और अंततः बचाव दल ने उन्हें ढूंढ निकाला। इस घटना पर बनी फिल्म Alive आज भी प्रेरणा देती है।

1971 में जूलियन कोएपके की कहानी भी कम रोमांचक नहीं। पेरू के जंगलों में क्रैश हुई फ्लाइट LANSA 508 की इकलौती सर्वाइवर, 17 साल की जूलियन 11 दिन तक जंगल में भटकती रहीं। घायल होने के बावजूद, उन्होंने नदी का सहारा लिया और अंत में स्थानीय लोगों ने उन्हें बचा लिया।

अन्य रोमांचकारी सोल सर्वाइवर कहानियाँ

वेस्ना वुलोविच: 33,000 फीट से गिरकर भी जिंदा

1972 में, JAT फ्लाइट 367 में बम विस्फोट के बाद विमान यूगोस्लाविया के ऊपर टुकड़ों में बिखर गया। 22 साल की फ्लाइट अटेंडेंट वेस्ना वुलोविच 33,000 फीट की ऊँचाई से नीचे गिरीं। मलबे का हिस्सा और बर्फीली ढलान ने उनकी जान बचाई। रीढ़ की हड्डी टूटने और कई चोटों के बावजूद, वे महीनों बाद ठीक हो गईं। उनकी यह कहानी गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज है।

बाहिया बकरी: समुद्र में 9 घंटे की जंग

2009 में, येमेनिया फ्लाइट 626 हिंद महासागर में क्रैश हो गई। 14 साल की बाहिया बकरी, जो तैरना भी नहीं जानती थीं, मलबे के एक टुकड़े को थामकर 9 घंटे तक समुद्र में डटी रहीं। बचाव दल ने उन्हें तब ढूंढा, जब वे पूरी तरह थक चुकी थीं। 153 यात्रियों में वे अकेली बचीं। उनकी हिम्मत आज भी मिसाल है।

जॉर्ज लैमसन जूनियर: आग के गोले से निकला जिंदा

1985 में, गैलेक्सी एयरलाइंस फ्लाइट 203 रनवे पर फिसलकर आग का गोला बन गई। 17 साल के जॉर्ज लैमसन जूनियर सीट बेल्ट की वजह से फंसे थे, लेकिन आखिरी पल में वे मलबे से निकल भागे। 71 यात्रियों में केवल वही बचे। बाद में उन्होंने अपनी कहानी किताब में लिखी, जो प्रेरणा देती है।

सेसिलिया सिचान: चार साल की मासूम की जिंदगी

1987 में, नॉर्थवेस्ट एयरलाइंस फ्लाइट 255 टेकऑफ के दौरान क्रैश हो गई। चार साल की सेसिलिया सिचान अपनी माँ की गोद में थीं। मलबे में दबे होने के बावजूद, वे चमत्कारिक रूप से बच गईं। 156 में से वे इकलौती सर्वाइवर थीं। उनकी कहानी हौसले की मिसाल है।

ये कहानियाँ साबित करती हैं कि सबसे अंधेरी घड़ी में भी जिंदगी की उम्मीद बाकी रहती है। ये कहानियाँ बताती हैं कि विपदा में भी हौसला और सूझबूझ इंसान को नई जिंदगी दे सकती हैं।

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