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क्राइम

देश में 2024 में 19860 करोड़ रुपये की साइबर ठगी

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लखनऊ, ०३ नवंबर २०२४। साइबर ठगों का आतंक देश भर में फैल गया है। साइबर अपराध, विशेष रूप से ‘डिजिटल अरेस्ट’ और निवेश या रोजगार के बहाने वित्तीय धोखाधड़ी की घटनाएं कोविड-19 महामारी के बाद से बढ़ गई हैं, जिसकी रोकथाम अब भी चिंता का सबब है। पुलिस आंकड़ों के मुताबिक, साइबर अपराधियों ने देश में 2024 में 19860 करोड़ रुपये की साइबर ठगी की है।
पुलिस के आंकड़ों के मुताबिक, जनवरी 2022 से अगस्त 2024 के बीच राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल के पास 38.85 लाख से अधिक कॉल दर्ज की गई हैं, जिनमें से 6.05 लाख से अधिक उत्तर प्रदेश से थीं। इनमें से 84.53 प्रतिशत कॉल वित्तीय धोखाधड़ी से संबंधित थीं। साइबर अपराधियों ने 3,153 करोड़ रुपये की ठगी की थीं, जबकि राष्ट्रव्यापी आंकड़ों के मुताबिक देश में 19,860 करोड़ रुपये की साइबर ठगी के मामले हो चुके हैं।
हाल ही में उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले में एक सेवानिवृत्त बैंकर और उनकी पत्नी को पांच दिनों तक ‘डिजिटल अरेस्ट’ में रखे जाने की घटना सामने आई थी। ठगों ने बुजुर्ग दंपती को सीबीआई और आरबीआई का अधिकारी बनकर एक करोड़ रुपये से अधिक की रकम ट्रांसफर करने के लिए मजबूर किया था। अगस्त में लखनऊ के संजय गांधी परास्नातक आयुर्विज्ञान संस्थान के एक वरिष्ठ डॉक्टर ने भी 2.81 करोड़ रुपये गंवा दिए थे। नोएडा और वाराणसी समेत कई जिलों से भी ऐसे अपराधों की कई खबरें सामने आई हैं।

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