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देश में बेगारी की नई फौज खड़ी हो रही है

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प्रहरी संवाददाता, मुंबई। देश आर्थिक विषमता की ओर बढ़ रहा है। ई-श्रम पोर्टल के आंकड़ों से खुलासा हुआ है कि असंगठित क्षेत्र के श्रमिक काफी गरीबी में जीवन-यापन कर रहे हैं। समाज में आर्थिक रूप से काफी असमानता है। इनमें से ज्यादातर समाज के पिछड़े समुदाय से आते हैं। हाल ही में कुछ राज्यों ने अकुशल मजदूरों के लिए न्यूनतम मासिक वेतन में 273 रुपये और दैनिक वेतन में महज 11 रुपये की भारी बढ़ोतरी की है। अब मासिक न्यूनतम वेतन 12045 और दैनिक वेतन 463 रुपये होगा।

बता दें कि ई-श्रम पोर्टल पर ओबीसी के 45.32 प्रतिशत श्रमिकों की संख्या सबसे ज्यादा है, जिन्हें 10 हजार रुपये से भी कम मजदूरी मिलती है। इसके अलावा, लगभग 94.11 प्रतिशत श्रमिकों की मासिक कमाई 10,000 रुपये से कम है, तो वहीं 4.36 प्रतिशत श्रमिकों को 10,001 से 15,000 रुपये की मजदूरी मिलती है। सरकार ने देश में असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों का एक व्यापक डेटाबेस (एनडीयूडब्ल्यू) तैयार करने के लिए इस पोर्टल को 26 अगस्त 2021 में शुरू किया था।

पिछले वर्ग से 74 प्रतिशत श्रमिक
बता दें कि ई-श्रम पोर्टल पर पंजीकृत 74 प्रतिशत श्रमिक अनुसूचित जाति (एससी), अनुसूचित जनजाति (एसटी) और अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) से आते हैं। नवंबर 2021 में मासिक 10,000 रुपये से कम कमाने वाले असंगठित क्षेत्र के कामगारों की संख्या 92.37 प्रतिशत थी। इसमें एससी, एसटी और ओबीसी वर्ग के श्रमिकों की संख्या 72.58 प्रतिशत थी। इस साल दस हजार से कम कमाने वाले मजदूरों की संख्या में 2 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है।

बेगारों की नई फौज
बता दें कि कुछ राज्य सरकारों ने शहर में अकुशल मजदूरों के लिए न्यूनतम मासिक वेतन 11622 और दैनिक वेतन 447 रुपये तय किया है। एक अप्रैल 2022 से न्यूनतम मासिक वेतन 11895 और दैनिक वेतन 458 रुपये कर दिया गया है। अर्ध कुशल श्रमिक-2 का मासिक न्यूनतम वेतन 12045 और दैनिक वेतन 463 रुपये होगा। राज्य सरकारों ने दैनिक वेतन में महज 11 रुपये और मासिक वेतन में 273 रुपये की वृद्धि किया है।

उत्तर प्रदेश टॉप पर
रोचक बात यह भी है कि ई-श्रम पोर्टल पर पंजीकरण के मामले में शीर्ष पांच राज्यों में उत्तर प्रदेश है, लेकिन सीएमआईई पोर्टल पर बेरोजगारी के आंकड़े यूपी में 3 प्रतिशत से भी कम है। यूपी के बाद बिहार, पश्चिम बंगाल, मध्य प्रदेश और ओडिशा के श्रमिकों ने इस पोर्टल पर पंजीकरण कराया है। पंजीकृत श्रमिकों में सबसे अधिक 52.11 प्रतिशत का मुख्य पेशा खेती है, वहीं 9.93 प्रतिशत लोग घरों में काम करते हैं जबकि 9.13 प्रतिशत निर्माण क्षेत्र में मजदूरी करते हैं।

 

 


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