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एआई टेक्नोलॉजी से लैस हथियारों से डरी दुनिया!

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एक्सपर्ट बोले- ये मानवता को भी मिटा सकते हैं
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से लैस हथियार प्रणाली से बढ़ रहा है खतरा

वॉशिंगटन। दुनियाभर में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से लैस हथियार प्रणाली को विकसित करने की होड़ मची है। टर्मिनेटर स्टाइल में बनाए जा रहे स्मॉर्ट हथियारों को लेकर विशेषज्ञों ने चेतावनी जारी की है। अमेरिका के प्रसिद्ध कंप्यूटर विशेषज्ञ और कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय के वैज्ञानिक स्टुअर्ट रसेल ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से लैस किलिंग मशीनों से जोखिम इतना बड़ा है कि वह चाहते हैं कि उन पर प्रतिबंध लगा दिया जाए। ये हथियार एक बार अपने टॉरगेट को लॉक करने के बाद उसे खुद के कंप्यूटर के जरिए खोजकर मार सकते हैं। अमेरिका, चीन, रूस और इजरायल समेत कई देशों के वैज्ञानिक इस तरह के हथियारों पर काम कर रहे हैं।

ड्रोन से ले जा सकेंगे विस्फोटक
कंप्यूटर विशेषज्ञ रसेल ने कहा कि एक घातक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से लैस क्वाडकॉप्टर (ड्रोन) जूता पॉलिश के डिब्बे जितना छोटा हो सकता है। यह ड्रोन छोटी मात्रा में विस्फोटक को लेकर भी उड़ान भर सकता है। करीब 3 ग्राम विस्फोटक किसी व्यक्ति को नजदीक से मारने के लिए काफी है। किसी एक कंटेनर में एक लाख घातक ड्रोन को रखा जा सकता है।

अमेरिका कर रहा है भारी निवेश
अमेरिका का रक्षा मंत्रालय भी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस में काफी निवेश कर रहा है। तकनीकों से लैस सभी हथियारों की फायरिंग का कंट्रोल हालांकि इंसानों के हाथ में ही होगा। अमेरिकी वैज्ञानिकों का दावा है कि अगर हम क्वांटम एआई सिस्टम विकसित करते हैं जो इंसानी दिमाग की और ज्यादा सटीकता के साथ नकल कर सकता है तो यह कार्बनिक पदार्थ से संवेदना विकसित करने की दिशा में तकनीक की खोज के लिए लंबा सफर तय कर सकता है।

शोध के मुताबिक, मजबूत ब्रेन-कंप्यूटर-इंटरफेस एक दिन इंसानी दिमाग की भाषा बोलने में सक्षम हो सकता है। एक ऐसी परिस्थिति जिसमें कंप्यूटर हमारी इंद्रियों पर कब्जा कर सकते हैं और हमारे दिमाग में सीधे इनपुट भेज सकते हैं।


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