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संयुक्त राष्ट्र महासभा पर संकट की छाया: ट्रंप की वापसी, AI का बढ़ता खतरा और युद्धों के बीच वैश्विक व्यवस्था की परीक्षा

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  • UN महासभा में ट्रंप की वापसी: युद्ध, AI और संयुक्त राष्ट्र के भविष्य पर दुनिया की नजर

✍️ डिजिटल न्यूज डेस्क, न्यूयॉर्क /नई दिल्ली | दुनिया के करीब 130 राष्ट्राध्यक्ष इस सप्ताह न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा के लिए जुट रहे हैं। लेकिन इस बार महासभा ऐसे दौर में हो रही है, जब मध्य-पूर्व और रूस – यूक्रेन के बीच युद्ध गहरा रहे हैं, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के बढ़ते जोखिम वैश्विक चिंता बन रहे हैं और खुद संयुक्त राष्ट्र अपनी वित्तीय तथा राजनीतिक प्रासंगिकता को लेकर भारी दबाव में है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप लगातार दूसरे वर्ष महासभा के मंच पर लौटेंगे, जबकि चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग इस बार न्यूयॉर्क जाने के बजाय गुरुवार को वॉशिंगटन में ट्रंप के साथ आमने-सामने बैठक करेंगे।

संयुक्त राष्ट्र के 80 वर्ष पूरे होने के दौर में संगठन खुद भी गंभीर वित्तीय और राजनीतिक दबाव से गुजर रहा है। अमेरिका ने इस सप्ताह नियमित बजट में 72.5 करोड़ डॉलर का भुगतान कर महासभा में अपना मतदान अधिकार गंवाने से बचा लिया, लेकिन उसके ऊपर अब भी संयुक्त राष्ट्र का एक अरब डॉलर से अधिक बकाया है। ट्रंप प्रशासन संयुक्त राष्ट्र के खर्च में कटौती और व्यापक सुधारों की मांग करता रहा है तथा अमेरिका कई UN संस्थाओं से बाहर भी हो चुका है।

शी जिनपिंग महासभा से दूर, ट्रंप से करेंगे मुलाकात

चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग इस बार न्यूयॉर्क में महासभा में शामिल नहीं होंगे। वह संयुक्त राष्ट्र महासभा के बजाय गुरुवार को वॉशिंगटन में ट्रंप के साथ आमने-सामने बातचीत करेंगे। शी ने इससे पहले 2021 में महासभा को वीडियो के माध्यम से संबोधित किया था।

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुतारेस का कार्यकाल 2026 के अंत में समाप्त होना है और उनके उत्तराधिकारी की तलाश भी शुरू हो चुकी है। फिलहाल इस दौड़ में कोई स्पष्ट अग्रणी उम्मीदवार नहीं है। 15 सदस्यीय सुरक्षा परिषद में यूक्रेन, AI और मध्य-पूर्व सहित कई मुद्दों पर उच्चस्तरीय बैठकें होने की संभावना है।

AI बना वैश्विक एजेंडे का नया बड़ा मुद्दा

इस वर्ष महासभा में AI को लेकर चिंताएं भी प्रमुखता से उठेंगी। हाल में AI उद्योग से जुड़े कई प्रमुख लोगों ने तकनीक के विकास की गति पर समन्वित नियंत्रण की अपील की है और आशंका जताई है कि AI भविष्य में खुद को बेहतर बनाने की क्षमता हासिल कर मानव नियंत्रण से बाहर हो सकता है।

गुतारेस लंबे समय से AI के लिए वैश्विक नियमों और साझा सुरक्षा मानकों की वकालत करते रहे हैं। संयुक्त राष्ट्र ने 2023 में AI पर एक सलाहकार निकाय भी बनाया था, जिसमें तकनीकी क्षेत्र, सरकारों और अकादमिक जगत के प्रतिनिधि शामिल हैं।

मध्य-पूर्व और यूक्रेन पर भी रहेगी नजर

मध्य-पूर्व का संकट महासभा की चर्चाओं के केंद्र में रहेगा। ईरान और अमेरिका के बीच जारी संघर्ष तथा क्षेत्र में बढ़ते तनाव से ऊर्जा कीमतों और वैश्विक महंगाई पर असर पड़ रहा है। यमन के हूती लड़ाकों की गतिविधियों से बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य में समुद्री परिवहन को लेकर भी चिंता बढ़ी है।

ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन बुधवार को महासभा को संबोधित करेंगे, जबकि इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू गुरुवार को भाषण देंगे। फिलिस्तीनी राष्ट्रपति महमूद अब्बास लगातार दूसरे वर्ष व्यक्तिगत रूप से महासभा में शामिल नहीं होंगे; अमेरिकी प्रशासन ने उन्हें वीजा नहीं दिया है। महासभा ने उन्हें वीडियो के जरिए संबोधित करने की अनुमति दी है।

यूक्रेन युद्ध भी एजेंडे में प्रमुख रहेगा। यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की और रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव महासभा को संबोधित करेंगे। रूस सुरक्षा परिषद का स्थायी सदस्य है और उसके पास वीटो अधिकार होने के कारण परिषद यूक्रेन युद्ध समाप्त कराने के लिए निर्णायक कार्रवाई नहीं कर सकी है।

गुतारेस ने यूक्रेन युद्ध के मानवीय प्रभाव के साथ-साथ खाद्य सुरक्षा और ऊर्जा कीमतों पर पड़ रहे असर को भी रेखांकित किया है। उन्होंने काला सागर के रास्ते यूक्रेन और रूस से खाद्य पदार्थ, उर्वरक और ऊर्जा उत्पादों के सुरक्षित निर्यात की व्यवस्था सुनिश्चित करने की आवश्यकता बताई है।


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